CG News:– होली की रात क्यों हुआ छोटे भाई द्वारा बड़े भाई का हत्या कांड? पिता के मिथ्या बयान पर क्या हुई कार्रवाई?

होली पर सगे भाई की हत्या, आरोपी को आजीवन कारावास, पिता के मिथ्या बयान पर कार्रवाई
Raigarh News:– पारिवारिक कलह में अपने सगे बड़े भाई की हत्या करने वाले आरोपी को अदालत ने आजीवन कारावास और 50 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही मृतक के पिता द्वारा अदालत में कथित मिथ्या बयान देने के मामले में भी कार्रवाई की गई।
Raigarh, रायगढ़। होली के अवसर पर हुए पारिवारिक विवाद में छोटे भाई द्वारा अपने सगे बड़े भाई की हत्या करने का मामला अदालत में सुलझा। सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार जैन ने थाना जूटमिल क्षेत्र के इस बहुचर्चित प्रकरण में आरोपी सुनील कुमार दास (28 वर्ष), पिता पंचराम महंत, निवासी तरकेला जूटमिल, को दोषी ठहराते हुए आजिवन कारावास और 50,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
इस प्रकरण की विवेचना तत्कालीन थाना जूटमिल में पदस्थ उप निरीक्षक गिरधारी साव ने की थी, जबकि अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक पी.एन. गुप्ता ने प्रभावशाली पैरवी की।
होली की रात हुआ विवाद, बना हत्या का कारण
ग्राम तरकेला निवासी पंचराम और उनकी पत्नी भानुमति के तीन पुत्र थे—निमाई दास, सुनील दास (आरोपी) और निर्मल दास (मृतक)। 14 मार्च 2025 को होली की रात्रि लगभग 8 बजे, सुनील और निर्मल के बीच आपसी विवाद हो गया। परिवार के प्रयासों के बावजूद आरोपी समझौता नहीं करता और लकड़ी के डंडे से सिर, हाथ और पैरों पर हमला कर देता है, जिससे निर्मल दास की मौके पर ही मृत्यु हो जाती है।
पंचराम महंत की रिपोर्ट पर थाना जूटमिल में मर्ग क्रमांक 27/2025 के तहत शव पंचनामा और पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद अपराध क्रमांक 75/2025, धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत मामला दर्ज किया गया।
मजबूत विवेचना और 14 गवाहों की साक्ष्य पुष्टि
उप निरीक्षक गिरधारी साव ने घटनास्थल का निरीक्षण, भौतिक साक्ष्य संकलन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य तथ्यों को वैज्ञानिक रूप से जोड़कर मजबूत केस तैयार किया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों के सशक्त बयान पेश किए, जिससे आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित हुआ।
मिथ्या बयान पर पिता के खिलाफ सख्त रुख
आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया, लेकिन न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट किया कि आरोपी का कृत्य मानव वध की श्रेणी में आने वाली हत्या है।
जांच और अदालत के दौरान यह भी सामने आया कि मृतक और आरोपी के पिता पंचराम महंत (70 वर्ष) ने पुलिस को दिए गए अपने पूर्व कथन के विपरीत न्यायालय में मिथ्या बयान दिया, ताकि आरोपी को बचाया जा सके। इस पर सत्र न्यायाधीश ने उनके खिलाफ धारा 383 भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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