CG IPS News:– पदोन्नति से चुके आईपीएस ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र , कहा समानता का सिद्धांत छोड़ पदोन्नति में उनके साथ किया गया भेदभाव, अपराधिक प्रकरण वाली आईपीएस अफसरों को मिली पदोन्नति

CG IPS News:– कुछ दिनों पहले आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति सूची में नाम नहीं होने से क्षुब्ध कबीरधाम एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने अपने पत्र में बताया है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ महादेव सट्टा एप और भ्रष्टाचार तथा आपराधिक प्रकरणों के मामले हैं और जिनमें कोर्ट से अंतिम स्वीकृति नहीं हुई है उन्हें भी प्रमोशन दे दिया गया है। पर पुलिस मुख्यालय द्वारा पिछले चार बार से पदोन्नति के लिए अनुशंसा करने के बावजूद उन्हें प्रमोशन नहीं दिया गया है।
Raipur रायपुर। हाल ही में आईपीएस अधिकारियों की राज्य सरकार ने पदोन्नति सूची जारी की है। जारी आदेश में कई आईपीएस को पदोन्नत किया गया है। कुछ आईपीएस को एसपी से एसएसपी,कुछ को एसएसपी से डीआईजी,कुछ को डीआईजी से आईजी और एक आईपीएस को आईजी से एडीजी के पद पर पदोन्नत किया गया है। अब पदोन्नति से चुके कवर्धा एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख पदोन्नति से वंचित करने और भेदभाव करने के संबंध में पीड़ा व्यक्त की है।
अपने पत्र में एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई ने जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड एवं स्केल तथा उप पुलिस महानिरीक्षक के पदपर पदोन्नत किये जाने संबंध में संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों एवं नियमों का उल्लंघन एवं भेदभाव किये जाने की बात कह अभ्यावेदन दिया है।
धर्मेंद्र सिंह छवई ने बताया है कि वे भारतीय पुलिस सेवा (2012 बैच) के अधिकारी हैं। वर्तमान में वे पुलिस अधीक्षक कबीरधाम के पद पर कार्यरत है। छवई ने बताया है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा समय–समय पर उनकी पदोन्नति के संबंध में संनिष्ठता प्रमाणित करते हुए दस अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 एवं 31 जुलाई 2025 के माध्यम से उनकी पदोन्नति की अनुशंसा की गई है, किंतु उनके विरूद्ध लोकायुक्त संगठन भोपाल मे जाँच विवेचना स्तर पर लंबित होने के कारण उक्त पदोन्नतियों नहीं दी गई है। जबकि उक्त प्रस्ताव में अन्य चार आईपीएस अधिकारियों केडी खिलाफ महादेव सट्टा एप, भ्रष्टाचार के मामले जांच में लंबित होने तथा इनमें से एक आईपीएस के खिलाफ दर्ज एफआईआर की अंतिम स्वीकृति कोर्ट से नहीं होने के बावजूद उन चारों आईपीएस को पदोन्नत किया गया है। जबकि मेरे विरूद्ध प्रकरण लंबित होने के आधार पर पदोन्नति नहीं दी गई है, जो कि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद-16 के तहत् अवसर की समानता का खुला उल्लंघन है।
इन नियमों के तहत नहीं दिया जा सकता प्रमोशन:–
आईपीएस धर्मेंद्र सिंह छवई ने नियमों का हवाला देते हुए बताया है कि भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा पदोन्नति हेतु जारी नियम दिनांक- 15 जनवरी 1999 के कंडिका-11 के अनुसार 11 (A) के अनुसार निलंबन के दौरान 11 (B) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र जारी किया जा चुका हो और विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो। 11 (C) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध न्यायालय में आपराधिक प्रकरण लंबित हो।
उपरोक्त तीन बिंदुओं के आधार पर ही किसी भी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी को पदोन्नति/प्रवर श्रेणी वेतनमान के लिए अपात्र किया जा सकता है। किन्तु मेरे प्रकरण में उक्त कंडिकाएं लागू नहीं है, फिर भी जान–बूझकर बदनियति एवं पूर्वाग्रहों के चलते मुझे न तो वरिष्ठ वेतनमान दिया जा रहा है, और न ही उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है, जो कि मेरे मौलिक अधिकारों का स्पष्टतः हनन है। मेरे समान स्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है।
बता दे धर्मेंद्र सिंह छवई इस समय कबीरधाम जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ हैं। यह उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का गृह जिला है। विजय शर्मा गृह मंत्रालय के भारसाधक मंत्री भी हैं। उनके गृह जिले के एसपी के द्वारा पदोन्नति नहीं मिलने पर पत्र लिखकर पीड़ा व्यक्त करने से पुलिस विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

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