हथकरघा योजना केवल कागज़ी, बुनकरों से छल है सरकार का बजट: मोतीलाल देवांगन

केंद्र के बजट पर बुनकर नेता मोतीलाल देवांगन की तीखी प्रतिक्रिया, कहा हथकरघा के नाम पर पुरानी घोषणाओं की रीपैकेजिंग, जब तक दाम और बाजार नहीं, तब तक योजना बेकार
रायपुर, 1 फरवरी। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित महत्मा गांधी ग्राम स्वराज/हैंडलूम योजना को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ बुनकर नेता मोतीलाल देवांगन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस योजना को “पुरानी घोषणाओं की नई पैकेजिंग” बताते हुए इसे बुनकरों के साथ छल करार दिया है।
मोतीलाल देवांगन ने कहा कि सरकार हर बजट में खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प के नाम पर बड़ी–बड़ी बातें करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बुनकरों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। “जब तक बुनकरों को उनके उत्पाद का वाजिब दाम, कच्चे माल की सस्ती उपलब्धता और सीधी बाजार पहुँच नहीं मिलेगी, तब तक ऐसी योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेंगी”।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में केंद्र सरकार की नीतियों के कारण लाखों बुनकरों को अपना पारंपरिक काम छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। “हाथकरघा सेक्टर में रोजगार घटा है, लागत बढ़ी है और बुनकर कर्ज़ के बोझ तले दबा है। ऐसे में सिर्फ ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ और ‘वैश्विक बाजार’ की बातें करना वास्तविकता से आंख चुराने जैसा है”।
पूर्व विधायक ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने बजट में बुनकरों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा जैसे ठोस प्रावधानों का कोई स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महात्मा गांधी के नाम पर कोई योजना ला रही है, तो उसे ग्राम स्वराज की भावना के अनुरूप गांव, कारीगर और बुनकर को केंद्र में रखना चाहिए।
मोतीलाल देवांगन ने मांग की कि केंद्र सरकार हाथकरघा और खादी क्षेत्र के लिए अलग से प्रभावी कानून बनाए, बुनकरों को सीधी सब्सिडी दे और बिचौलियों की भूमिका समाप्त करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बुनकरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो देशभर में बुनकर आंदोलन तेज किया जाएगा।
कांग्रेस नेता की इस प्रतिक्रिया के बाद बजट में घोषित योजनाओं को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।

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