डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में वार्षिक उत्सव की धूम युवा ऊर्जा से सराबोर रहा चौथा दिन – रमन लोक कला महोत्सव होगा वैश्विक – संतोष चौबे

बिलासपुर। डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में आयोजित रमन लोक कला महोत्सव 2026 के चौथे दिन परिसर देशभक्ति, लोक रंग और युवा ऊर्जा से सराबोर रहा। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे छात्र-छात्राओं ने गीत, संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत देशभक्ति गीतों और समूह नृत्य से हुई, जिसने वातावरण में राष्ट्रप्रेम की भावना का संचार किया।

विद्यार्थियों ने एकल एवं सामूहिक नृत्य, एकल गायन और समूह गायन के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रभावी प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ी, ओड़िया, बंगाली और राजस्थानी लोक संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत रूप में मंच पर उतारा। ताल, लय और भाव-भंगिमा के अद्भुत समन्वय ने देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि रमन लोक कला महोत्सव की परिकल्पना छत्तीसगढ़ से शुरू हुई थी, जो अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसे वैश्विक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने युवाओं को लोक कला, भाषा और संस्कृति से जुड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विविधता और समग्र विकास की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, संस्कृति और तकनीक के क्षेत्र में एक साथ कार्य करने वाली संस्थाएं ही वास्तविक प्रगति का आधार बनती हैं।
रेखा देवार को शारदा चौबे लोक कला सम्मान
महोत्सव के दौरान प्रसिद्ध लोक गायिका रेखा देवार को शारदा चौबे लोक कला सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें सम्मान पत्र एवं नगद राशि प्रदान की गई।

पद्म संवाद में साझा हुए संघर्ष के अनुभव
विशेष सत्र “पद्म संवाद” में पद्मश्री सम्मानित कलाकारों ने अपने जीवन के संघर्ष और साधना की प्रेरक कहानियां साझा कीं। पद्मश्री रामलाल बैरेट, अजय मांडवी, जागेश्वर यादव और राधेश्याम बारले ने लोक कला संरक्षण, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक विरासत को

आगे बढ़ाने के अपने अनुभव साझा किए वैचारिक सत्र : छत्तीसगढ़ी फिल्मों का संसार – छत्तीसगढ़ी फिल्मों का संसार विषय पर आयोजित वैचारिक सत्र में फिल्म निर्माता संतोष जैन, मनोज वर्मा और निर्देशक ज्ञानेश तिवारी ने सिनेमा और समाज के गहरे संबंधों पर चर्चा की। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट के संयोजक अरविंद मिश्रा ने कहा कि सिनेमा समाज का दर्पण है और इसके बिना सामाजिक समझ अधूरी है।

पूरे आयोजन में विद्यार्थियों का उत्साह, दर्शकों की सहभागिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की गरिमा ने महोत्सव को यादगार बना दिया

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