सीएमएचओ कार्यालय कोरबा में करोड़ों की चिकित्सकीय खरीदी पर उठे सवाल, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में चिकित्सकीय उपकरणों एवं सामग्रियों की खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए करोड़ों रुपये के बजट का उपयोग नियमों के अनुरूप खुली निविदा (ओपन टेंडर) प्रक्रिया के माध्यम से न कर, उसे छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर मनचाहे विक्रेताओं को कार्य सौंपा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यदि संपूर्ण बजट को एकमुश्त निविदा के माध्यम से जारी किया जाता तो सभी पात्र विक्रेताओं को समान अवसर मिलता और प्रतिस्पर्धी दरों पर सामग्री की खरीद संभव होती। लेकिन बजट को टुकड़ों में विभाजित कर खरीद किए जाने से पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
दशकों से एक ही जगह पर पदस्थ कर्मचारी पर आरोप
इस पूरे मामले में सीएमएचओ कार्यालय के स्टोर अनुभाग में लंबे समय से पदस्थ फार्मासिस्ट श्री जय सिंह जगत की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि उनकी देखरेख में खरीद प्रक्रिया संचालित की जा रही है और उन्हें उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।
बिना आपूर्ति के भुगतान का संदेह
जानकार सूत्रों का कहना है कि कुछ मामलों में चिकित्सकीय सामग्री की वास्तविक आपूर्ति के बिना ही संबंधित देयकों का भुगतान कर दिए जाने की आशंका है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला हो सकता है।
बिना नोडल की पूर्वानुमति / सूचना के की जाती है लाखों की खरीदी
सूत्रों का कहना है कि चिकित्सकीय सामग्री की क्रय नियमानुसार संबंधित नोडल एवं क्रय समितियों की स्वीकृति उपरांत की जाती है , परन्तु CMHO कार्यालय के नियमित शाखा में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा क्रय नियमों को तार-तार करते हुए सामनों का क्रय किया जा रहा है।
भौतिक सत्यापन की मांग
मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर यह मांग उठ रही है कि खरीदे गए सभी उपकरणों और सामग्रियों का स्वतंत्र एजेंसी से भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जिन वस्तुओं के भुगतान किए गए हैं, वे वास्तव में उपलब्ध हैं या नहीं।
उठ रहे प्रमुख सवाल
क्या करोड़ों रुपये की खरीदी का स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑडिट कराया जाएगा?
क्या बिना आपूर्ति भुगतान की आशंका की जांच होगी?
क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी?
क्या भविष्य में सभी खरीद प्रक्रियाएं पूर्ण पारदर्शिता के साथ ओपन टेंडर के माध्यम से की जाएंगी?
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में स्वास्थ्य विभाग या सीएमएचओ कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है।
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