किसानों के नाम पर घोषणाएं, खेतों तक नहीं पहुंची राहत” : मोतीलाल देवांगन

जांजगीर चांपा । छत्तीसगढ़ में चाँपा के पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोतीलाल देवांगन ने राज्य सरकार के बजट 2025-26 और 2026-27 में किसानों के लिए किए गए प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कागज़ों में योजनाएं बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन खेतों में हालात जस के तस हैं।
देवांगन ने कहा कि पिछले साल सरकार ने किसानों के लिए समर्थन मूल्य पर बोनस, सिंचाई विस्तार, कृषि यंत्रीकरण अनुदान और फसल विविधीकरण जैसी कई घोषणाएं की थीं। इस वर्ष के बजट में भी कृषि अधोसंरचना, भंडारण क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक, एआई आधारित खेती और किसान क्रेडिट कार्ड के विस्तार की बात दोहराई गई है। लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश छोटे और सीमांत किसानों को इन योजनाओं का सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया में देरी, भुगतान में विलंब और पंजीयन संबंधी जटिलताओं के कारण किसान परेशान हैं। सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार की घोषणा तो हर साल होती है, लेकिन कई क्षेत्रों में अब भी किसान बारिश पर निर्भर हैं। कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का लाभ सीमित किसानों तक सिमट कर रह गया है।
देवांगन ने यह भी कहा कि सरकार ने प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने की बात कही है, लेकिन प्रशिक्षण, बाजार उपलब्धता और उचित मूल्य की गारंटी के बिना यह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। भंडारण और कोल्ड स्टोरेज की योजनाओं का जिक्र जरूर है, परंतु ग्रामीण स्तर पर पर्याप्त सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आय दोगुनी करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बढ़ती लागत, उर्वरकों के दाम और डीजल की कीमतों ने खेती को महंगा बना दिया है। कर्जमाफी या ब्याज राहत पर कोई ठोस और व्यापक पहल नजर नहीं आती।
अंत में मोतीलाल देवांगन ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। बजट में किसानों के नाम पर बड़ी घोषणाएं करने के बजाय सरकार को पारदर्शी क्रियान्वयन, समय पर भुगतान, सिंचाई की वास्तविक उपलब्धता और फसलों के बेहतर दाम सुनिश्चित करने पर प्राथमिकता देनी चाहिए। जब तक खेत तक राहत नहीं पहुंचेगी, तब तक बजट के आंकड़े किसानों के जीवन में बदलाव नहीं ला पाएंगे।

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