चार लाख की फाइल… और एक फांसी: धोखाधड़ी जांच के बीच युवक की आत्महत्या, सहायता राशि प्रकरण ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

चार लाख की फाइल… और एक फांसी: धोखाधड़ी जांच के बीच युवक की आत्महत्या, सहायता राशि प्रकरण ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
बिलासपुर। बिलासपुर जिले के तखतपुर थाना क्षेत्र में आर्थिक सहायता राशि से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच के दौरान एक युवक द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। घटना ने प्रशासनिक प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और जांच प्रणाली को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

सर्पदंश बताकर ली गई चार लाख की सहायता
तखतपुर क्षेत्र के चनाडोंगरी निवासी उर्वशी श्रीवास ने अपने पति पुरुषोत्तम श्रीवास की मृत्यु को सर्पदंश से होना दर्शाते हुए तहसील कार्यालय में आर्थिक सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर शासन से चार लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर दी गई।
हालांकि बाद में कलेक्टर के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने पूरे प्रकरण की जांच की। जांच में पाया गया कि सहायता स्वीकृति आदेश में तहसीलदार के हस्ताक्षर फर्जी थे। इसके अलावा जिस मर्ग क्रमांक का उल्लेख आवेदन में किया गया था, वह किसी अन्य व्यक्ति के आत्महत्या प्रकरण से संबंधित पाया गया।
अपराध दर्ज, बयान के लिए बुलाया गया
जांच रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार की शिकायत पर तखतपुर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। शुक्रवार शाम पुलिस ने उर्वशी श्रीवास को बयान के लिए थाने बुलाया। वह अपने पुत्र कमलेश श्रीवास के साथ थाने पहुंची थी। पूछताछ के दौरान कमलेश अपनी मां को थाने में छोड़कर घर लौट गया।
घर में फांसी लगाकर दी जान
पुलिस के अनुसार घर पहुंचने के बाद कमलेश श्रीवास ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने इसकी सूचना डायल 112 और पुलिस को दी। मौके पर पहुंची टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शनिवार को पोस्टमार्टम कराया जाना प्रस्तावित है।
मृत्यु के कारणों पर भी सवाल
परिवार के अनुसार वर्ष 2022 में पुरुषोत्तम श्रीवास को सांप ने काट लिया था, जिससे वे लकवाग्रस्त हो गए थे और लगभग तीन माह बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार घर पर ही किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संबंधित प्रकरण में न तो मर्ग इंटिमेशन दर्ज हुआ था और न ही पोस्टमार्टम कराया गया था।
इसके बावजूद जिस मर्ग क्रमांक के आधार पर सहायता राशि स्वीकृत हुई, वह किसी अन्य मामले का पाया गया। इससे आशंका जताई जा रही है कि किसी बिचौलिए ने महिला के नाम का उपयोग कर दस्तावेज तैयार किए हों। हालांकि पुलिस ने अब तक किसी संभावित बिचौलिए का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
जांच कई स्तरों पर जारी
मामले में धोखाधड़ी और आत्महत्या—दोनों पहलुओं की अलग-अलग जांच की जा रही है। दस्तावेजों की सत्यता, सहायता राशि स्वीकृति प्रक्रिया और संभावित मध्यस्थों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
घटना ने सहायता राशि वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और दस्तावेज सत्यापन तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इस प्रकरण में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो पाती है।

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