CG Budget Session:-विधानसभा में उठा खाद घोटाले का मुद्दा,विधायक ब्यास कश्यप ने मार्कफेड की भूमिका पर उठाए सवाल,किसानों को खाद नहीं, कालाबाजारी पर उच्च स्तरीय जांच की मांग

CG Budget Session:- विधानसभा बजट सत्र में जांजगीर–चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने राज्य में खाद की कमी और कालाबाजारी का मुद्दा उठाते हुए खाद घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने धान उत्पादन में गिरावट, किसानों को खाद उपलब्ध कराने, मछुआरों को प्राथमिकता देने और कृषि विभाग के रिक्त पद भरने की भी मांग रखी।

CG Budget Session:- रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन कृषि, पशुपालन, मछली पालन और आदिम जाति विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान जांजगीर–चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने राज्य में खाद की कमी और कालाबाजारी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रहा है, जबकि खुले बाजार में ऊंचे दामों पर इसकी बिक्री हो रही है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
विधायक कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की आत्मा खेती–किसानी में बसती है और यहां के अधिकांश जनप्रतिनिधि भी किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा, “मैं पहले किसान हूं और बाद में विधायक। खेती मेरी पहचान है और मिट्टी मेरी आत्मा है, इसलिए किसानों की पीड़ा को करीब से महसूस करता हूं।
सोसायटियों में खत्म, बाजार में महंगा
उन्होंने कहा कि सरकारी सोसायटियों में अक्सर यूरिया का स्टॉक खत्म बता दिया जाता है, जबकि वही यूरिया खुले बाजार में 1500 रुपये प्रति बोरी तक बिक रहा है। इससे साफ है कि किसानों को कृत्रिम कमी का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य में खाद वितरण की नोडल एजेंसी मार्कफेड ने स्थानीय कारखानों को दरकिनार कर राजस्थान की एक निजी कंपनी के खाद को सोसायटियों के माध्यम से बेचवाया। उन्होंने कहा कि सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) खाद की कीमत सहकारी समितियों के लिए 500 रुपये तय की गई है, जबकि बाजार में यही खाद 450 रुपये में उपलब्ध है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पिछले साल डीएपी के बदले तीन बोरी एसएसपी देने के पीछे भी कमीशनखोरी का खेल था।
धान उत्पादन में आई गिरावट
विधायक कश्यप ने कहा कि खाद की कमी का असर धान उत्पादन पर भी पड़ा है। इस बार सरकार 149 लाख मीट्रिक टन के बजाय 141 लाख मीट्रिक टन धान ही खरीद पाई। जांजगीर–चांपा जिले में भी धान उत्पादन 6.5 लाख मीट्रिक टन से घटकर करीब 6.10 लाख मीट्रिक टन रह गया है।
ऋण वितरण और बैंक सुविधा पर सवाल
उन्होंने कहा कि जांजगीर–चांपा जिले में पिछली सरकार के समय 184 करोड़ रुपये का ऋण वितरण हुआ था, जो वर्तमान सरकार में घटकर 164 करोड़ रुपये रह गया है। वहीं जिला सहकारी बैंक बिलासपुर में यूपीआई सुविधा नहीं होने से उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना का नाम बदलकर कृषक उन्नति योजना कर दिया है, लेकिन बोनस की राशि देने में बैंक असमर्थ हैं।
मछली पालन को बढ़ावा देने की मांग
मछली पालन विभाग पर चर्चा करते हुए विधायक ने कहा कि जांजगीर–चांपा जिले में बड़ी संख्या में बारहमासी पानी से भरे तालाब हैं, जहां मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि मछुआरा समुदाय को मछली पालन और मत्स्य ठेकों में प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने हाल ही में जांजगीर में मछुआरा समुदाय के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि 32 मछुआरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मामला भी सामने आया है। सरकार को उनका हक सुनिश्चित करना चाहिए और जिले में मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र भी खोले जाने चाहिए।
पशुपालन और कृषि में सुधार की जरूरत
विधायक कश्यप ने पशुपालन विभाग पर बोलते हुए देसी नस्ल की कोसली गाय के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार की स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने कृषि विभाग में रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग करते हुए कहा कि कृषि की पढ़ाई करने वाले युवा रोजगार की उम्मीद में सरकार की ओर देख रहे हैं। यदि समय रहते भर्ती नहीं हुई तो युवाओं में आक्रोश बढ़ सकता है।

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