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CG Afim News:– रिकॉर्ड में मक्का, खेत में अफीम! कलेक्टर ने किया महिला अधिकारी को निलंबित

CG Afim News:– जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच में रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में बड़ा फर्क मिलने पर कृषि विस्तार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि फसल सर्वेयर और पटवारी की भूमिका भी जांच के घेरे में है।

Durg दुर्ग। खेत में क्या बोया गया है, यह किसान से पहले सरकारी रिकॉर्ड बताने लगता है। कागज पर मक्का उगता है, जमीन पर धान लहलहाता है और उसी खेत के पीछे अफीम की खेती पकड़ी जाती है। यह कहानी किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि दुर्ग जिले के समोदा गांव की है, जहां सरकारी रिकॉर्ड और हकीकत के बीच का फर्क अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है।

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मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जांच के आदेश दिए थे। जांच में लापरवाही और रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया गया है। इससे पहले कलेक्टर ने तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिनमें एकता साहू, फसल सर्वेयर शशिकांत साहू और ग्राम समोदा की पटवारी अनिता साहू शामिल थीं।

मक्का का प्रदर्शन प्लॉट, लेकिन फसल कुछ और

जांच में सामने आया कि जिस खेत में अफीम की खेती पकड़ी गई, उसे कृषि विभाग के रिकॉर्ड में मक्का फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था। यह प्लॉट भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के भाई विमल ताम्रकार के खेत में दर्ज था।

लेकिन जब दस्तावेजों और जमीन की हकीकत का मिलान हुआ, तो तस्वीर बदल गई। जिस जगह को मक्का का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहां वास्तव में धान की खेती हो रही थी। इससे यह साफ हुआ कि फसल प्रदर्शन योजना के तहत शासन को गलत जानकारी दी गई।

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फोटो भी किसी और किसान की

फसल प्रदर्शन योजना में नियम है कि जिस खेत में प्रदर्शन प्लॉट बनाया जाता है, उसी किसान की फोटो और उसी फसल की तस्वीर अपलोड की जाती है। लेकिन जांच में पाया गया कि रिपोर्ट में किसी दूसरे किसान की फोटो अपलोड कर दी गई।

जिस मक्के की तस्वीर रिपोर्ट में लगाई गई थी, उसी इलाके के पीछे अफीम की खेती भी की जा रही थी। यानी तस्वीर कुछ और, जमीन पर फसल कुछ और।

डिजिटल सर्वे में भी सच छिपा रहा

सितंबर 2025 में किए गए डिजिटल फसल सर्वे में फसल सर्वेयर शशिकांत साहू ने खसरा नंबर 309 को पड़ती भूमि और खसरा नंबर 310 को धान की फसल बताया था। जबकि जांच में सामने आया कि दोनों स्थानों पर वास्तव में अफीम की खेती हो रही थी।

पटवारी ने बिना मौके पर देखे कर दिया अप्रूवल

फसल सर्वे की रिपोर्ट का सत्यापन पटवारी को करना होता है। लेकिन पटवारी अनिता साहू ने बिना मौके पर जांच किए ही रिपोर्ट को स्वीकृति दे दी।

अब प्रशासन को शक है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सांठगांठ का मामला भी हो सकता है। इसलिए तीनों अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

कार्रवाई की शुरुआत, जांच जारी

फिलहाल प्रशासन ने कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच जारी है। सवाल यह है कि अगर कागज पर मक्का उगता रहा और खेत में कुछ और, तो यह खेल कितने दिनों से चल रहा था — और किसकी जानकारी में चल रहा था।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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