CG:– CG ASP–DSP Posting:– मलाईदार मैदानी रेंज के दीवाने हैं राज्य पुलिस सेवा के अफसर, घूम फिर कर इसी रेंज में मलाई छान रहे ASP–DSP

CG:– जीरो टॉलरेंस की नीति सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्थानांतरण और पदस्थापना में भी इसका समान रूप से पालन जरूरी है, लेकिन बिलासपुर पुलिस रेंज की स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। एक बार जो अधिकारी अविभाजित बिलासपुर जिले में पदस्थ हो जाता है, वह यहां से बाहर जाने को तैयार नहीं दिखता।
Bilaspur बिलासपुर। पुलिस विभाग के भीतर खुलकर कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारी अपने रसूख, संपर्क और जुगाड़ तंत्र के दम पर तबादले को भी मज़ाक बना चुके हैं। सूची चाहे कितनी भी सख्त हो, ये अफसर किसी न किसी रास्ते से फिर बिलासपुर पुलिस रेंज में लौट आते हैं। जानकारी के अनुसार ऐसे पांच से छह ASP–DSP रैंक के अधिकारी हैं, जो वर्षों से इसी रेंज में कुर्सी घुमाते रहे हैं।
स्थिति यह है कि कई अधिकारी और कर्मचारी पारिवारिक मजबूरियों के बावजूद दूरस्थ जिलों में सेवा देने को मजबूर हैं। कहीं पति–पत्नी अलग–अलग जिलों में पदस्थ हैं, तो कहीं बीमार माता–पिता की देखभाल प्रभावित हो रही है। कई दिव्यांग अधिकारी–कर्मचारी भी ऐसे हैं, जिन्हें उनकी जरूरतों के अनुरूप स्थान पर पदस्थापना नहीं मिल पा रही है। इसके उलट कुछ अधिकारियों को हर बार मनचाही पोस्टिंग मिल जाती है।
इसी बीच बिलासपुर पुलिस रेंज में लगभग आधा दर्जन ASP और DSP रैंक के अधिकारी ऐसे बताए जा रहे हैं, जो बार–बार घूम–फिरकर यहीं पदस्थ हो जाते हैं। समय–समय पर इनकी पोस्टिंग बिलासपुर, जांजगीर–चांपा या गौरेला–पेंड्रा जैसे जिलों में होती रही है, जो सभी इसी रेंज के अंतर्गत आते हैं।
राजनीतिक पकड़, बिलासपुर रेंज में स्थायी पोस्टिंग
सूत्र बताते हैं कि जिले में पदस्थ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का मायका और ससुराल दोनों ही बिलासपुर शहर में स्थित हैं। इसके बावजूद वे वर्षों से यहीं पदस्थ हैं। चर्चा है कि राजनीतिक रसूख और मजबूत पहुंच के कारण ऐसे अधिकारियों को कभी नक्सल प्रभावित या कठिन क्षेत्रों में नहीं भेजा जाता है , जबकि विभागीय नियमों के अनुसार पुलिस अधिकारियों को समय-समय पर संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी सेवाएं देनी होती हैं।
बताया जाता है कि चाहे प्रमोशन हो या तबादला, ये अधिकारी किसी न किसी रूप में बिलासपुर पुलिस रेंज के भीतर ही अपनी जगह बना लेते हैं। कभी आईजी रेंज कार्यालय, कभी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, तो कभी जिला स्तर की जिम्मेदारी—इनकी पदस्थापना अविभाजित बिलासपुर और वर्तमान बिलासपुर पुलिस रेंज के इर्द–गिर्द ही सिमटी रहती है।
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