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CG News:- रिश्वत नहीं तो मुआवजा नहीं? वनरक्षक पर गंभीर आरोप, 4 साल से न्याय के लिए भटक रहा किसान

CG News:- पेंड्रा वनमंडल में भ्रष्टाचार की बू आने लगी है। जंगली सियार के हमले में भैंसे की मौत के बाद किसान को मिलने वाला मुआवजा चार साल से फाइलों में दफन है। आरोप है कि बीट गार्ड ने पैसे मांगे, और रिश्वत नहीं मिलने पर गरीब किसान की फाइल दबाकर रख दी। अब किसान ने वन मंडल अधिकारी से शिकायत कर कार्रवाई की गुहार लगाई है।

GPM:-जीपीएम। वन विभाग की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत भदौरा के किसान दद्दूसिंह राठौर को जंगली जानवर के हमले में मरे अपने भैंसे का मुआवजा चार साल बाद भी नहीं मिल पाया है। पीड़ित किसान का आरोप है कि बीट गार्ड ने फाइल आगे बढ़ाने के लिए पैसे की मांग की थी और पैसे नहीं देने पर प्रकरण को दबाकर रखा गया।

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जंगली सियार के हमले में मरा भैंसा

मामला पेंड्रा वनमंडल के खोढरी रेंज का है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भदौरा निवासी किसान दद्दूसिंह राठौर के भैंसे को जंगली सियार ने काट लिया था। गंभीर रूप से घायल भैंसे का इलाज कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में किसान को वन विभाग की ओर से मुआवजा दिया जाना चाहिए, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी राशि नहीं मिल पाई है।

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बीट गार्ड पर पैसे मांगने का आरोप

पीड़ित किसान का आरोप है कि खोढरी रेंज अंतर्गत बीट गार्ड राकेश राठौर ने प्रकरण से जुड़े दस्तावेज वन विभाग कार्यालय भेजने के लिए पैसे की मांग की थी।

किसान का कहना है कि जब उसने पैसे देने से इनकार कर दिया तो वनरक्षक ने फाइल को ही दबाकर रख दिया, जिससे मुआवजा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

पैसे देने वालों को मिला मुआवजा

किसान ने आरोप लगाया है कि इसी तरह के दो अन्य मामलों में किसानों ने पैसे दिए तो उन्हें मुआवजा राशि मिल गई, लेकिन पैसे नहीं देने के कारण उसका मामला वर्षों से लंबित पड़ा है।इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

वन मंडल अधिकारी से की शिकायत

पीड़ित किसान ने पूरे मामले की लिखित शिकायत वन मंडल अधिकारी से की है और संबंधित वनरक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।अब सवाल यह है कि चार साल से मुआवजे के लिए भटक रहे किसान को न्याय कब मिलेगा और विभाग आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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