CG News: – कलेक्टर कर रहे राजस्व मामलों की पेंडेंसी खत्म करने का दावा, दूसरी और राजस्व अधिकारी, आदेशों को दिखा रहे ठेंगा,कलेक्टर के दावों को खोखला करने का प्रयास

राजस्व अधिकारियों की करतूत से जिला प्रशासन की छवि हो रही खराब कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा राजस्व विभाग ?
CG News: – जांजगीर–चांपा में राजस्व मामलों की पेंडेंसी को लेकर कलेक्टर के दावों और जमीनी सच्चाई में बड़ा अंतर सामने आया है।जनदर्शन में 75 आवेदन मिलने के बाद भी सीमांकन, नामांतरण और खाता विभाजन जैसे मामलों में कार्रवाई ठप बताई जा रही है।कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद तहसील स्तर पर आदेशों का पालन नहीं हो रहा।आदेश पारित होने के बाद भी कई मामलों में जमीन की नाप तक नहीं हुई है।छोटे–छोटे कार्यों के लिए नागरिकों को सीधे कलेक्टर कार्यालय तक गुहार लगानी पड़ रही है। जनता के बीच यह चर्चा है कि बिना “प्रेरणा” फाइल आगे नहीं बढ़ती।राजस्व विभाग की कार्यशैली से प्रशासन की साख पर असर पड़ रहा है।अब सवाल जवाबदेही और ठोस कार्रवाई का है।
Janjgir Champa News: – जांजगीर–चांपा। जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सीमांकन, नामांतरण, खाता विभाजन और अभिलेख दुरुस्तीकरण जैसे नियमित कार्यों के लिए नागरिकों को सीधे कलेक्टर कार्यालय तक गुहार लगानी पड़ रही है। यह स्थिति बताती है कि तहसील और एसडीएम स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी या तो निष्क्रिय हैं या फिर आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे या उच्चाधिकारियों का इन अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। साप्ताहिक जनदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने 75 आवेदन पत्रों की सुनवाई की। कलेक्टर ने अपर कलेक्टर एवं डिप्टी कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
आवेदनकर्ताओं में तहसील सारागांव, ग्राम कड़ारी के साहेब लाल यादव द्वारा अभिलेख दुरुस्तीकरण, ग्राम कुम्हारीकला के अरुण कुमार गबेल द्वारा खाता विभाजन, शिवरीनारायण के ग्राम कांसा निवासी मुस्कान भैना द्वारा जाति प्रमाण पत्र, अकलतरा तहसील के ग्राम गढोला निवासी गंगाराम कोशले द्वारा सीमांकन, चांपा तहसील के ग्राम गतवा निवासी भोलाशंकर द्वारा फौती नामांतरण जैसे सीधे राजस्व विभाग से जुड़े मामले शामिल थे।
आदेश के बाद भी नाप नहीं: क्या निर्देशों की अवमानना?

असल में, ग्राम खेखारा निवासी संदीप राठौर का मामला प्रशासनिक दावों की परतें खोलता है। उनकी निजी भूमि खसरा नंबर 823/1 के सीमांकन और दूरी निर्धारण हेतु सक्षम अधिकारी द्वारा पूर्व में आदेश जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद राजस्व निरीक्षक और पटवारी आज तक मौके पर नाप करने नहीं पहुंचे। आवेदक ने जनदर्शन में भी शिकायत दर्ज कराई (टोकन क्रमांक 20604260000259), लेकिन महीनों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बार–बार संपर्क करने पर केवल आश्वासन ही मिलता रहा है।

सवाल सीधा है कि जब कलेक्टर स्तर से आदेश जारी हो चुका है, तब भी एसडीएम और तहसीलदार के स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या फिर सुनियोजित टालमटोल?
क्या राजस्व तंत्र समानांतर व्यवस्था चला रहा है?
यदि हर छोटे–बड़े राजस्व कार्य के लिए जनता को कलेक्टर दरबार में आवेदन देना पड़े, तो तहसील और अनुविभागीय कार्यालयों की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जनदर्शन में 75 आवेदन आना इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर समाधान तंत्र कमजोर है। जनता का आरोप है कि बिना “प्रेरणा” के फाइलें आगे नहीं बढ़तीं और महीनों तक लंबित रखी जाती हैं। सीमांकन और नामांतरण जैसे मामलों में देरी से किसानों और भू–स्वामियों को आर्थिक व मानसिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में राजस्व व्यवस्था: भ्रष्टाचार का अड्डा?
राजस्व विभाग में नाप–जोख, सीमांकन, नामांतरण जैसे सामान्य कार्यों के लिए महीनों की देरी आम बात बन चुकी है। आम नागरिकों का आरोप है कि बिना “प्रेरणा शुल्क” फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। यदि आदेश पारित होने के बाद भी जमीन का नाप नहीं होता, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह प्रशासनिक अवमानना है।
राज्य सरकार सुशासन और पारदर्शिता के दावे करती है, लेकिन जांजगीर–चांपा में राजस्व विभाग की स्थिति इन दावों को चुनौती देती दिख रही है। अब सवाल यह है कि क्या लंबित मामलों की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? क्या एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी? या फिर जनदर्शन केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा?
जांजगीर–चांपा जिले की जनता की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं। यदि आदेशों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि शासन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

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