Bilaspur News:– सड़क सुरक्षा माह में एक कोशिश, ताकि रास्ते भी सुरक्षित रहें और रिश्ते भी

Bilaspur: यह कोई मंचीय कार्यक्रम नहीं था, न ही सरकारी औपचारिकता निभाने का प्रयास। ग्राम खैरा में जो देखने को मिला, वह एक सीधा, संवेदनशील और ज़रूरी संवाद था—पुलिस और आम लोगों के बीच। मौका था सड़क सुरक्षा माह 2026 का और माध्यम बना चेतना अभियान।
बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर थाना रतनपुर की पुलिस टीम 7 जनवरी 2026 को महामाया कॉलेज, रतनपुर में आयोजित एनएसएस कैंप के तहत ग्राम खैरा पहुँची। उद्देश्य स्पष्ट था—ग्रामीण इलाकों तक यह संदेश पहुँचना कि सड़क सुरक्षा सिर्फ कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जवाबदेही है।

ग्रामीणों से कहा गया कि सड़क केवल आने–जाने का रास्ता नहीं, बल्कि सतर्कता और समझदारी की परीक्षा भी है। बातचीत में यातायात नियम, सड़क सुरक्षा, नशा मुक्ति, महिला व बाल सुरक्षा, कानूनी अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल रहे। भाषा सरल थी, उदाहरण वही जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े हैं।
कार्यक्रम में मौजूद अनुविभागीय पुलिस अधिकारी कोटा, श्रीमती नूपुर उपाध्याय ने सड़क दुर्घटनाओं को लेकर बेहद साफ और तथ्यात्मक बात रखी। उन्होंने कहा कि शराब पीकर वाहन चलाना सीधे मौत को न्योता देना है और दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना कोई विकल्प नहीं, बल्कि जीवन रक्षक आवश्यकता है।
एसडीओपी नूपुर उपाध्याय ने समझाया कि हाथ–पैर टूटने का इलाज संभव है, लेकिन सिर में गंभीर चोट लगने पर ज़िंदगी बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में बाहरी चोट दिखाई नहीं देती, लेकिन अंदरूनी चोटें जानलेवा साबित होती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पुलिस ने ऐसे कई मामले देखे हैं, जहाँ गंभीर एक्सीडेंट के बावजूद सिर्फ हेलमेट पहनने की वजह से व्यक्ति की जान बच सकी।
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से संवाद करते हुए पूछा कि कितने लोगों के पास हेलमेट है और कितने लोग उसका नियमित उपयोग करते हैं। साथ ही यह भी बताया कि जिनके पास हेलमेट नहीं है, उन्हें सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत निशुल्क हेलमेट उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि कोई भी संसाधनों की कमी के कारण जोखिम में न पड़े।
साइबर अपराध को लेकर भी लोगों को सतर्क किया गया। बताया गया कि एक अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक या लालच भरा मैसेज कैसे पलभर में पूरी कमाई साफ कर सकता है। संदेश साफ था—अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा न करें, चाहे सामने वाला कितना भी भरोसेमंद क्यों न लगे।
एसडीओपी ने विशेष रूप से महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों से कहा कि किसी भी परेशानी की स्थिति में पुलिस से संपर्क करना उनका अधिकार है, डरने की जरूरत नहीं।
इस संवाद के साक्षी बने महामाया कॉलेज और खैरा स्कूल के प्राचार्य, बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे। यह आयोजन भले ही किसी बड़ी सुर्खी जैसा न लगे, लेकिन समाज में भरोसे और जागरूकता की नींव ऐसे ही कार्यक्रमों से मजबूत होती है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि चेतना अभियान आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा, क्योंकि जब लोग जागरूक होते हैं, तभी सड़कें सुरक्षित बनती हैं—और समाज भी।

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