अदालत में हंगामा: कथावाचक की पेशी के दौरान मची अफरा–तफरी, पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं

बिलासपुर, 16 नवंबर। जिला अदालत परिसर शनिवार को उस वक्त अफरा–तफरी में बदल गया जब कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज की पेशी के दौरान अचानक भीड़ में मौजूद समर्थक नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच लोगों ने पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए उपद्रवियों को परिसर से बाहर किया और कानून व्यवस्था भंग करने वाले आरोपियों के खिलाफ दो गैर–जमानती धाराओं में अलग–अलग एफआईआर दर्ज की हैं।
पुरी घटना उस वक्त हुई जब कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा था। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने अचानक शोरगुल करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। उपद्रवी तत्वों ने माहौल को तनावपूर्ण बनाते हुए पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की और भय का वातावरण तैयार किया।
स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और अदालत परिसर से सभी उपद्रवियों को बाहर खदेड़ दिया। बाद में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं—
पहले मामले में BNS की धाराएं 221, 132, 296, 351(2) और 3(5),
जबकि दूसरे मामले में 191(2), 221, 132, 296 और 351(2) के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं।
दरअसल, 12 नवंबर को तखतपुर क्षेत्र में आयोजित भागवत कथा के दौरान आशुतोष चैतन्य महाराज पर सतनामी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। शिकायत के बाद पुलिस ने BNS 353(2) और एससी–एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया था।
घटना के बाद सतनामी समाज ने पुलिस कार्रवाई पर संतोष जताया था, लेकिन कथावाचक की अदालत में पेशी के दौरान कुछ बाहरी तत्वों ने माहौल बिगाड़ दिया। नारेबाजी, गाली–गलौज और धार्मिक उकसावे वाले शब्दों के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम पर बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने सख्त लहजे में कहा, “कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। कानून सर्वोपरि है, और उपद्रव करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।”
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