स्टे ऑर्डर के बाद भी निर्माण जारी, प्रशासनिक आदेशों की खुली अवहेलना तहसीलदार के निर्देश बनाम ज़मीनी हकीकत, कार्रवाई पर टिकी निगाहें…

कसडोल (बलौदाबाजार): ताजा मामला ग्राम कटगी तहसील कसडोल का है छत्तीसगढ़ के कसडोल तहसीलदार न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) के बावजूद विवादित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहने का गंभीर मामला सामने आया है। खसरा नंबर 1175/16 पर जारी आदेश की अनदेखी ने प्रशासनिक नियंत्रण और कानून के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तहसीलदार न्यायालय कसडोल ने 27 फरवरी 2026 को आदेश क्रमांक 434/वा0/तह0/2026 पारित किया था। यह आदेश आवेदक सत्यनारायण देवांगन की याचिका पर जारी हुआ, जिसमें विवादित भूमि पर हो रहे कथित अवैध निर्माण को तत्काल रोकने की मांग की गई थी। इसके बावजूद आरोप है कि प्रमोद कुमार देवांगन द्वारा निर्माण कार्य जारी रखा गया।

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि ग्राम कोटवार श्यामलाल जाटवर ने मौके पर पहुंचकर दो बार निर्माण रोकने के निर्देश दिए, लेकिन न तो न्यायालय के आदेश का पालन हुआ और न ही स्थानीय स्तर पर दी गई चेतावनियों का कोई प्रभाव दिखा।
तहसीलदार के आदेश पत्र से यह भी स्पष्ट होता है कि मामला संयुक्त परिवार की संपत्ति और संयुक्त आय के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप है कि परिवार के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना, संयुक्त आय से खरीदी गई भूमि पर बोर खनन और मकान निर्माण शुरू किया गया, जिसे संपत्ति हड़पने की मंशा से जोड़ा जा रहा है।
तहसीलदार ने आदेश की प्रतिलिपि थाना प्रभारी कसडोल और संबंधित हल्का पटवारी को भेजकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, शिकायतकर्ता ने न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
अब पूरा मामला प्रशासन की तत्परता और निष्पक्ष कार्रवाई पर निर्भर करता है—क्या आदेश केवल फाइलों तक सीमित रहेंगे या ज़मीन पर भी उनका असर दिखाई देगा, यही इस प्रकरण की सबसे बड़ी कसौटी है।

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