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CG News:– CG News:– सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षा के साथ संस्कारों की मजबूत नींववार्षिकोत्सव में बच्चों की प्रतिभा और सांस्कृतिक चेतना का भव्य प्रदर्शन

CG News: सरस्वती शिशु मंदिर ऐसे शिक्षण संस्थान हैं, जहां विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता और जीवन मूल्यों की भी शिक्षा दी जाती है। यह बात जांजगीर-चांपा के सांसद कमलेश जांगड़े ने कही।

Janjgir-Champa जांजगीर-चांपा। सरस्वती शिशु मंदिर नैला विद्यालय में 02 जनवरी को आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए सांसद कमलेश जांगड़े ने कहा कि शिशु मंदिर की पहचान शिक्षा के साथ संस्कारों से है। उन्होंने विद्यालय की संगीतमय प्रार्थना, भोजन मंत्र और अनुशासित वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यहां के बच्चे निरंतर शिक्षा और संस्कार के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। सदाचार के माध्यम से बच्चों को नैतिक मूल्य, आचार और व्यवहार की शिक्षा दी जाती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके भविष्य में स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि इस विद्यालय से पढ़े विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर पहुंचकर समाज और देश की सेवा कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने सभी को अंग्रेजी नववर्ष की शुभकामनाएं भी दीं।

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कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पूजन से हुई। इसके पश्चात मंच पर विराजमान माता सरस्वती, ओम और मां भारती के छायाचित्र का पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद कमलेश जांगड़े के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में नारायण चंदेल (पूर्व नेता प्रतिपक्ष, छत्तीसगढ़ विधानसभा), लीलाधर सुल्तानिया (संस्थापक सदस्य, वीणापाणि शिक्षण समिति) एवं रेखा देवा गढ़ेवाल (अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद जांजगीर) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जांजगीर-चांपा विधायक ब्यासनारायण कश्यप ने की।

इस अवसर पर वीणापाणि शिक्षण समिति के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत शर्मा ने विद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। समारोह के दौरान विद्यालय के पूर्व छात्र रंतिदेव राठौर को नायब तहसीलदार बनने तथा अतुल उपाध्याय को एथलेटिक्स की लंबी कूद स्पर्धा में अखिल भारतीय स्तर पर खेलने के लिए सम्मानित किया गया।

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पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने अपने संबोधन में कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर जैसी संस्थाएं संस्कारयुक्त शिक्षा का सशक्त आधार हैं। बचपन में दिए गए संस्कार व्यक्ति को जीवन भर सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के लिए लक्ष्य तय कर निरंतर परिश्रम करने की अपील की और कहा कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती, हर असफलता के पीछे सफलता का मार्ग छिपा होता है।

विधायक ब्यासनारायण कश्यप ने कहा कि यह संस्था छोटी शुरुआत से आगे बढ़ते हुए आज एक मजबूत शैक्षणिक केंद्र बन चुकी है। यहां शिक्षा और संस्कार का जो समन्वय है, वह अन्य विद्यालयों से इसे अलग पहचान देता है। उन्होंने आधुनिकता के साथ परंपराओं को संरक्षित रखने पर भी जोर दिया।

वार्षिकोत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। नन्हे बच्चों से लेकर वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों तक सभी ने नृत्य, नाटक और लोककलाओं के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश दिए। पंथी नृत्य, झांसी की रानी पर आधारित नाट्य नृत्य, छत्तीसगढ़ी लोककला, राउत नाचा, नारी शिक्षा पर आधारित नाटक तथा विभिन्न प्रादेशिक लोकनृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्राचार्य बबीता वर्मा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन आचार्या शकुन्तला यादव, द्वादश कक्षा की छात्रा चंचल कंवर एवं नम्रता साहू ने किया। आयोजन को सफल बनाने में वीणापाणि शिक्षण समिति के पदाधिकारियों, विद्यालय के आचार्यों, कर्मचारियों तथा अभिभावकों का सराहनीय योगदान रहा।

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