छत्तीसगढ़ का ₹1.72 लाख करोड़ का “संकल्प बजट”: समावेशी विकास की सशक्त पहल— डॉ. गीता सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026–27 का ₹1.72 लाख करोड़ का “संकल्प बजट” राज्य के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में एक दूरदर्शी एवं प्रभावशाली पहल है। यह बजट मात्र आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक वर्ग—किसान, महिला, युवा, श्रमिक तथा वंचित समुदाय—के जीवन में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाने का ठोस संकल्प है।
कृषि क्षेत्र के लिए किए गए व्यापक प्रावधान, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा विद्युत अनुदान की व्यवस्था किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए मातृ-स्वास्थ्य, पोषण और बालिका शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। ये पहलें महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को सुदृढ़ करेंगी तथा परिवार और समाज के समग्र विकास का आधार बनेंगी।
युवाओं के लिए औद्योगिक विस्तार, कौशल विकास और रोजगार सृजन की योजनाएँ प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई गति देंगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण आवास के लिए बढ़ाए गए प्रावधान सामाजिक सुरक्षा को सशक्त करेंगे और नागरिकों के जीवन-स्तर में व्यापक सुधार लाने में सहायक सिद्ध होंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. गीता सिंह का मानना है कि यदि इन योजनाओं का पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, तो यह “संकल्प बजट” छत्तीसगढ़ को समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सतत विकास के नए आयामों तक पहुँचाने में मील का पत्थर साबित होगा।
यह बजट वास्तव में जनकल्याण, विकास और विश्वास का दस्तावेज है—जो एक सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

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