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“इस विभाग में बिना पैसो के नहीं होता काम “फॉर्म 16 के लिए रिश्वत न दी, तो छीन लिया गया दस्तावेज़!”

जब कागज़ भी कीमत मांगने लगे, तो समझो सिस्टम खुद…लगे…

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जहां तालीम बिके रिश्वत के तराजू में,
उस जिले में ज्ञान नहीं, घोटाले पनपते हैं।
फॉर्म मांगने पर भी जब जेब देखी जाए,
समझो अब सिस्टम से नहीं, सिस्टम से डर लगता है!”

जांजगीरचांपा। जिले में भ्रष्टाचार का भूत अब शिक्षा विभाग के सिर चढ़कर बोल रहा है। अकलतरा ब्लॉक के एक स्कूल शिक्षक को जब सिर्फ एक फॉर्म 16 चाहिए था, तो विकासखंड शिक्षा कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों ने नोटों की मांग कर डाली। मना करने पर शिक्षक को अपमानित किया गया और दस्तावेज़ छीन लिया गया।

फॉर्म मांगना बना अपराध, रिश्वत न देना बनी सज़ा!

शासकीय प्राथमिक शाला सोनडीह में पदस्थ शिक्षक उपेंद्र कुमार धीवर ने 22 जनवरी को फार्म 16 के लिए आवेदन किया था। परंतु बीईओ कार्यालय में पदस्थ लिपिक भुवन सिदार ने 500 रुपये की मांग कर दी। शिक्षक ने जब रिश्वत देने से साफ मना कर दिया, तो उनका आवेदन खारिज कर दिया गया।

इसके बाद 23 फरवरी को संविदा ऑपरेटर देवेंद्र देवांगन ने फोन कर बताया कि फॉर्म तैयार है। लेकिन जब शिक्षक दस्तावेज लेने कार्यालय पहुंचे, तो दोबारा पैसे मांगे गए। पैसे देने पर फॉर्म 16 को हाथ से छीन लिया गया और खुलेआम धमकी दी गई।

“कभी गुरू कहलाते थे, अब अपमान सहते हैं,
घूस के बिना यहां बाबू भी कुछ नहीं करते हैं।
जब कागज़ भी कीमत मांगने लगे,
तब समझो सिस्टम खुद… लगे

शिक्षकों का फूटा ग़ुस्सा, जांच की मांग

  ईमानदार छात्रों के हित में है यह फैसला” – व्यापम नियमों पर बोले बीजेपी नेता खुबलाल ध्रुव

इस घटना के बाद जिलेभर में शिक्षकों का गुस्सा भड़क उठा है। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। अकलतरा बीईओ कार्यालय में मध्यान्ह भोजन से लेकर सामान्य प्रशासन तक, हर विभाग में रिश्वतखोरी आम हो चुकी है।

क्या बोले अधिकारी?

वही विकासखंड शिक्षा अधिकारी रत्नमाला सिंह ने कहा:
शिकायत मिली है। दो कर्मचारियों द्वारा पैसे मांगने की पुष्टि हुई है। मामले को उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल ये है…

क्या एक शिक्षक को फॉर्म 16 मांगने की भी आज़ादी नहीं है?
क्या ईमानदारी की कीमत अपमान और धमकी है?

“जिस कागज़ के सहारे लोन मिलना हो
उस कागज़ के लिए भी रिश्वत दी जाए? निश्चित ही आप के मन में भी सवाल उठता होगा की यह कैसे तंत्र है कि यहाँ
लोन के कागज़ के लिए भी रेट तय किया जा रहा है। खैर यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी इस तरह से कई घटना प्रदेश के अलग-अलग जिले से सामने आते रहे है।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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