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CG NEWS एक होम स्टे, एक सील और कई सवाल

Chhattisgarh प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की सरकार होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन कुछ मामलों में प्रशासन की कार्यप्रणाली इन दावों पर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है। विशेषकर प्रदेश के धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र में सामने आए हालिया घटनाक्रम ने यह सवाल पैदा किया है कि क्या प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष और समान है।

बिलासपुर । धार्मिक नगरी रतनपुर। आस्था, इतिहास और तीर्थाटन के बीच अब एक सवाल खड़ा है—क्या यहां कारोबार नियमों से चलता है या रसूख से?

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राम दरबार होम स्टे। एक ऐसा अतिथि गृह, जो अब सील है। संचालक देवकुमार थवाईत कहते हैं कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि दबाव की कहानी है। उनका आरोप है कि पड़ोसी राजू शर्मा और स्वीटी शर्मा के राजनीतिक प्रभाव के चलते उनका व्यवसाय निशाने पर आया। देवकुमार का कहना है कि उन्होंने बार-बार शिकायत की, लेकिन प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी।

नतीजा यह हुआ कि आज परिवार राम दरबार के सामने , घर के बाहर 21 जनवरी से देवकुमार थवाईत और उनका परिवार आमरण अनशन पर बैठे है।

सवाल सीधा है—अगर शिकायतें थीं, तो सुनवाई क्यों नहीं हुई?

लेकिन प्रशासन की अपनी कहानी है।

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तहसीलदार शिल्पा भगत इन आरोपों को खारिज करती हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले सूचना मिली थी कि अतिथि गृह में अवैध गतिविधियां चल रही हैं। पहले भी शिकायतें आई थीं। लोक शांति भंग होने की आशंका थी। इसलिए औचक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण में क्या मिला?
एक महिला और एक परिवार ठहरा हुआ मिला। एक महिला और उसके साथ रुके अतिथि अपनी पहचान और ठहरने की जानकारी ठीक से नहीं बता सके। रजिस्टर में एंट्री अधूरी थी। संचालक के बयान मेल नहीं खा रहे थे। प्रशासन कहता है—नियमों में कई खामियां थीं। इसलिए सील किया गया।

अब अतिथि गृह को खोलने के लिए आवेदन आ चुका है। दस्तावेज मांगे गए हैं। जांच होगी। आगे फैसला होगा।

लेकिन सवाल अब भी वहीं है।

अगर यह सिर्फ नियमों की बात है, तो अनशन क्यों?
अगर यह सिर्फ अवैध गतिविधि का मामला है, तो पारदर्शिता क्यों नहीं?
और अगर शिकायतें पहले से थीं, तो कार्रवाई तभी क्यों—जब मामला सार्वजनिक हो गया?

रतनपुर सिर्फ एक धार्मिक नगरी नहीं है।
यह प्रशासन और नागरिक के रिश्ते की भी परीक्षा है।

फैसला दस्तावेज करेंगे।
लेकिन सवाल जनता पूछ रही है।

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