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Janjgir Champa News: -दर्रीपारा का ‘वासु क्लिनिक’ सवालों के घेरे में: कार्रवाई के दावों के बीच दोबारा खुला, कथित अवैध संचालन,आखिर संरक्षण किसका?

दर्रीपारा में वर्षों से संचालन, कार्रवाई के दावों के बावजूद फिर खुला, आखिर संरक्षण किसका?

Janjgir Champa News: –जांजगीरनैला के दर्रीपारा मेंवासु क्लिनिकनाम से संचालित एक कथित अवैध क्लिनिक को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। बिना वैध डिग्री और पंजीकरण के उपचार किए जाने की आशंका जताई जा रही है। पूर्व में कार्रवाई के बावजूद दोबारा संचालन शुरू होने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों ने क्लिनिक की वैधता की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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Janjgir Champa News: –जांजगीरचांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीरचांपा जिले के जांजगीरनैला रेलवे स्टेशन स्थित दर्रीपारा (वार्ड क्रमांक 1) मेंवासु क्लिनिकनाम से चल रहे एक कथित अवैध क्लिनिक ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां बिना वैध डिग्री और शासकीय पंजीकरण के इलाज किया जा रहा है। यदि यह सही है, तो यह सीधासीधा मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।

कार्रवाई या सिर्फ औपचारिकता?

ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित व्यक्ति वर्षों से क्लिनिक चला रहा है। प्रशासन द्वारा दो बार कार्रवाई किए जाने की चर्चा जरूर है, लेकिन हर बार कुछ समय बाद क्लिनिक दोबारा शुरू हो जाता है। सवाल साफ है कि क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए थी? क्या किसी प्रभावशाली संरक्षण के चलते यह खेल जारी है? अगर पूर्व में सीलिंग या नोटिस जारी हुए थे, तो फिर यह क्लिनिक दोबारा कैसे खुल गया? जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इसका सार्वजनिक जवाब देना चाहिए।

कथित गलत उपचार और मौत का दावा

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पहले भी गलत उपचार के कारण एक व्यक्ति की जान गई थी। भले ही इस दावे की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो, लेकिन क्षेत्र में डर और आक्रोश का माहौल है। लोग पूछ रहे हैं
अगर शिकायतें थीं, तो ठोस जांच क्यों नहीं हुई?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, झोलाछापों की चांदी

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ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। इसी कमी का फायदा उठाकर कथित झोलाछाप सक्रिय हो जाते हैं। कम फीस और त्वरित इलाज के नाम पर लोगों को फंसाया जाता है, जबकि गंभीर मामलों में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

यहां बड़ा सवाल राज्य सरकार से भी है कि जब गांवों में पर्याप्त डॉक्टर और स्वास्थ्य केंद्र नहीं होंगे, तो लोग जाएंगे कहां? क्या स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी ही ऐसे कथित अवैध क्लिनिकों को बढ़ावा नहीं दे रही?

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कटघरे में

लगातार शिकायतों के बावजूद सख्त और स्थायी कार्रवाई होना प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि
क्लिनिक की डिग्री, पंजीकरण और लाइसेंस की सार्वजनिक जांच रिपोर्ट जारी की जाए।
अवैध पाए जाने पर तत्काल सील कर एफआईआर दर्ज की जाए।
जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर सभी अवैध क्लिनिकों की जांच हो।
संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए कि लापरवाही कहां हुई।

चुप्पी क्यों?

अब तक जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पष्ट और आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह चुप्पी संदेह को और गहरा कर रही है। जनस्वास्थ्य से जुड़े ऐसे गंभीर मुद्दे पर ढिलाई किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकती। अगर आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ एक क्लिनिक का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक है।

अब सवाल जनता का है कि कार्रवाई कब होगी, और कितनी सख्त होगी?

यह खबर स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। प्रशासनिक जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।)

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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