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Korba Coal Scam: SECL कुसमुंडा में 70 लाख टन कोयला गायब होने का आरोप, 2100 करोड़ के ‘कागजी कोयला’ घोटाले की शिकायत


Korba Coal Scam: – कोरबा स्थित SECL की कुसमुंडा परियोजना में करीब 70 लाख टन कोयला गायब होने और लगभग 2100 करोड़ रुपये के ‘कागजी कोयला’ घोटाले का आरोप लगाया गया है। शिकायत में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए CBI, ED और CVC से जांच तथा संबंधित कार्यालयों को तत्काल सील करने की मांग की गई है।

korba कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बड़ा कोयला घोटाला सामने आने का दावा किया गया है। आरोप है कि South Eastern Coalfields Limited की कुसमुंडा परियोजना में करीब 70 लाख टन कोयला गायब है। शिकायत में कहा गया है कि अधिकारियों ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर कागजों पर “अस्तित्वहीन कोयला” दिखाकर भारी गड़बड़ी की है।

आंकड़ों में बड़ा अंतर

दस्तावेजों के अनुसार मार्च 2025 के क्लोजिंग स्टॉक में करीब 96,90,541.49 टन कोयला दर्शाया गया था, जबकि अप्रैल 2025 के ओपनिंग स्टॉक में इसे घटाकर 89,99,258.16 टन दर्ज किया गया। वहीं शिकायत में दावा किया गया है कि मौके पर वास्तविक स्टॉक करीब 20 लाख टन ही है।

इसी आधार पर आरोप लगाया गया है कि करीब 70 लाख टन कोयला, जिसकी कीमत लगभग 2100 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, उसका कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

शिकायत में कुसमुंडा क्षेत्र के एरिया जीएम, कोलियरी मैनेजर, एरिया सर्वे ऑफिसर और एएफएम को जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव नहीं है।

CBI और ED से जांच की मांग

इस मामले में शिकायतकर्ता ने Central Bureau of Investigation, Enforcement Directorate और Central Vigilance Commission को पत्र लिखकर तत्काल जांच की मांग की है

रिकॉर्ड सील करने और ड्रोन सर्वे की मांग

शिकायत में कहा गया है कि कुसमुंडा परियोजना के डिस्पैच सेल और माइनिंग सर्वे कार्यालय को तुरंत सील किया जाए, ताकि कंप्यूटर डेटा और दस्तावेजों से छेड़छाड़ न हो सके।

साथ ही Lidar Drone Survey के जरिए अगले 24 घंटे में स्टॉकयार्ड का डिजिटल वॉल्यूमेट्रिक सर्वे कराने तथा ERP/SAP सिस्टम और वेटब्रिज रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।

साक्ष्य मिटाने की आशंका

शिकायत में यह भी आशंका जताई गई है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो आरोपी अधिकारी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा ग्रेड मैनिपुलेशन का भी संदेह जताया गया है, जिसमें पत्थर और मिट्टी को कोयला बताकर स्टॉक बैलेंस दिखाने का आरोप लगाया गया है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या Coal India Limited और कोयला मंत्रालय इस गंभीर आरोप पर जांच कराएंगे या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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