चीतल शिकार कांड व वनभूमि अतिक्रमण पर कोट की सख्ती:आरोपियों को नहीं मिली राहत
चीतल शिकार कांड व वनभूमि अतिक्रमण पर कोट की सख्ती:आरोपियों को नहीं मिली राहत

चीतल शिकार कांड व वनभूमि अतिक्रमण पर कोट की सख्ती:आरोपियों को नहीं मिली राहत
बिलासपुर वनमंडल अंतर्गत बेलगहना वन परिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा अवैध शिकार और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। वनमंडल अधिकारी नीरज के निर्देशन, उपवनमंडल अधिकारी अनिल भास्करन के मार्गदर्शन तथा वन परिक्षेत्र अधिकारी देव सिंह मरावी के नेतृत्व में विभाग ने दो अलग-अलग मामलों में प्रभावी कार्रवाई करते हुए आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।

पहले मामले में, 27 मार्च 2026 को मुखबिर की सूचना पर ईको जोहार रिसॉर्ट, कुरदर में छापेमारी की गई। यहां एक नर चीतल का अवैध शिकार कर उसका मांस पकाने और काटने की गतिविधि पाई गई। इस मामले में कुल 6 आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर 28 मार्च को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बिलासपुर के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। 30 मार्च को जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक द्वारा कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके बाद न्यायालय ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
दूसरे मामले में, भेलवाटीकरी परिसर में अवैध अतिक्रमण और वनभूमि पर कटाई के प्रयास का मामला सामने आया। करीब 13.11 हेक्टेयर वनभूमि पर अवैध कटाई कर जैव विविधता और वन्य जीवों के आवास को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इनमें से 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, जिन्हें पहले ही जेल भेजा जा चुका है। इनकी जमानत याचिका भी जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर द्वारा निरस्त कर दी गई।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में अवैध शिकार, अतिक्रमण, जंगल की कटाई और आगजनी जैसी गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। विभाग का कहना है कि ऐसे अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह पूरी कार्रवाई वन संरक्षण के प्रति विभाग की सख्ती और प्रतिबद्धता को दर्शाती

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