CG High voltage Policital Drama:– पंडाल सजा मंच बना पर कार्यक्रम के चंद घंटे पहले ही कार्यक्रम टला, केंद्रीय मंत्री तोखन का नाम नहीं होने से सियासी बवाल, दिल्ली के फोन के बाद स्थगित हुआ कार्यक्रम

CG High voltage Policital Drama:– बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में मंगलवार को सबकुछ किसी थ्रिलर फिल्म जैसा हुआ। नगर निगम ने करोड़ों रुपये झोंक दिए—पंडाल लग गया, मंच तैयार था, अधिकारी पहुंच चुके थे—but कुछ घंटे पहले ही सब रुक गया। वजह? आमंत्रण पत्र से केंद्रीय मंत्री तोखन साहू और दो दिग्गज विधायकों के नाम गायब! फिर जो हुआ, उसने पूरे शहर में सियासी तूफान खड़ा कर दिया।
Bilaspur। आप सोचिए—पंडाल तैयार है, मंच सज चुका है, साउंड और लाइट सब काम कर रहे हैं, और करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। लेकिन अचानक सब कुछ ठप। बिलासपुर नगर निगम का 45 करोड़ का विकास कार्यों का उद्घाटन कार्यक्रम रुक गया। और वजह? आमंत्रण पत्र पर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू और दो स्थानीय विधायकों के नाम न होना, और फिर दिल्ली से आया एक फोन।
नाम नहीं, राजनीति हावी
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव मुख्य अतिथि थे। स्थानीय विधायक धर्मजीत सिंह कार्यक्रम के अध्यक्ष बने। साथ में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला और महापौर पूजा विधानी भी मंच पर आने वाले थे। लेकिन कार्ड पर तीन नाम गायब—केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, नगर विधायक अमर अग्रवाल और बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक।
स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री को आमंत्रित नहीं करना और कार्ड से उनका नाम हटना भाजपा के अंदर नाराजगी का कारण बना। और फिर खबर आई—दिल्ली से फोन आया, और मिनटों में आदेश हुआ—“कार्यक्रम स्थगित किया जाए।”
शहर की गलियों में चर्चा
बिलासपुर की सड़कों पर, चाय की दुकानों पर, और राजनीतिक गलियारों में दिनभर यही बात गूंजती रही—भाजपा के अंदरूनी लड़ाई अब खुले मंच पर दिख रही है। नगर निगम के लाखों रुपये खर्च हुए कार्यक्रम पर राजनीति का ताला लटक गया।
शासन ने कहा कि नए काम जोड़ने के कारण कार्यक्रम स्थगित किया गया है, और बाद में दोबारा होगा। लेकिन असलियत यह है कि नगर निगम की मेहनत और करोड़ों की लागत फिलहाल बेकार चली गई।
कांग्रेस का तंज
कांग्रेस नेताओं ने इसका फायदा उठाया। जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष और कांग्रेस नेता प्रमोद नायक बोले, – नगर निगम की हालत बुरी है। भाजपा के अंदरूनी झगड़े में विकास ठप है। जनता देख रही है कि मंत्री–विधायक आपस में ही मुकाबले पर हैं।”
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा – विपक्ष को न बुलाना तो समझ आता है, लेकिन खुद के वरिष्ठों को नजरअंदाज करना असहज है। यह भाजपा की गुटबाजी का उदाहरण है। बस चिंगारी बाकी है।”
सत्तापक्ष की सफाई
महापौर पूजा विधानी ने कहा, “स्थानीय विधायक धर्मजीत सिंह के पारिवारिक कारणों से कार्यक्रम स्थगित हुआ। आगे प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाएगा।” उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विधायक सुशांत शुक्ला ने भी इसे प्रशासनिक कारणों से जोड़ते हुए कहा कि नए कार्यों के साथ कार्यक्रम फिर से आयोजित किया जाएगा।
पहले भी नाराजगी दिखी थी
युवा महोत्सव के दौरान अमर अग्रवाल की नाराजगी चर्चा में थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यक्रम में उनकी कुर्सी पीछे रखी गई थी। कलेक्टर की समझाइश के बाद भी उन्हें सामने बैठाना पड़ा।
इस कहानी का अगला अध्याय यही दिखाता है—जहाँ सत्ता के मंच पर तालियों से ज्यादा, तकरार की आवाज़ें सुनाई देती हैं।
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