वोट रिकाऊंटिंग के लिए एस डी एम के बाबू ने मांगा अभ्यर्थी से 60 हज़ार रुपए,दस लाख में चुनाव जिताने की गारंटी की बात कही बाबू ने,

कलेक्टर से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर हो रही
ऊंचे स्तर पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की चर्चा,
बातचीत की रिकार्डिंग हुआ वायरल,
डबल इंजिन की सरकार में भ्रष्ट अधिकारी बेखौफ,
चुनाव जिताने बड़ी रकम की मांग ऊंचे स्तर पर भ्रष्टाचार का संकेत,
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर इन दिनों एक ऐसे ऑडियो से गूंज रही है, जिसने लोगों के दिलों में बैठे सुशासन के सारे दावे हिलाकर रख दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस “वोट रिकॉर्डिंग” वाले ऑडियो को जिसने भी सुना, उसके लिए यह महज एक क्लिप नहीं, बल्कि सिस्टम की गहराई में धंसी सड़ांध का खुला सबूत बन चुका है।
ऑडियो में एक बाबू बड़ी सहजता से अभ्यर्थी से कह रहा है— सबको हिस्सा देना पड़ता है… 10 लाख से कम में रिकॉर्डिंग हो ही नहीं सकती।”सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि यह ऑडियो कलेक्टर तक पहुंच चुका है, अभ्यर्थी ने बाकायदा शिकायत भी कर दी है…लेकिन आज तक एक पत्ती भी नहीं हिली।न जांच शुरू, न बयान, न तलब, न किसी तरह की कार्रवाई।
जिस जिले में छोटे कर्मचारियों पर मामूली गलती पर भी फौरन नोटिस, सस्पेंशन और कार्रवाई होती है, उसी प्रशासन में इतने गंभीर आरोपों के बावजूद ये सन्नाटा— सवाल खुद खड़ा करता है कि आखिर किसकी हिफाज़त हो रही है?
बिलासपुर के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में भिलमी गांव के निवासी वासुदेव बिजौरे ने पंचायत चुनाव में केवल तीन मत के अंतर से हारने के बाद पुनर्मतगणना के लिए एसडीएम कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया। तभी एसडीएम कार्यालय में पदस्थ बाबू नरेंद्र कौशिक ने इस आवेदन को आगे बढ़ाने के एवज में उनसे 60 हजार रुपये की मांग की, जिसमें 50 हजार रुपये साहब के लिए और 10 हजार स्वयं बाबू के लिए मांगे गए। बाद में जब वासुदेव ने मोबाइल पर बाबू से बात की, तो बाबू ने साफ कहा कि दस लाख रुपये देने पर वह चुनाव में जीत दिलाने की गारंटी देगा। इस बातचीत को वासुदेव ने अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
वासुदेव बिजौरे ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत कलेक्टर कार्यालय में की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वायरल ऑडियो क्लिप में बाबू स्पष्ट रूप से कहते हुए सुने गए कि पैसे बांटने के बाद ही चुनाव जीत संभव होगा। यह मामला चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
भिलमी के वासुदेव बिजौरे का बहुप्रतीक्षित पुनर्मतगणना आवेदन लम्बे समय तक फंसा हुआ रहा। जब उन्होंने पुनः संपर्क किया तो एसडीएम कार्यालय के बाबू ने मांग बढ़ा कर दस लाख रुपये मांगे और जीत का भरोसा दिलाया। इस पूरे प्रकरण से प्रशासनिक भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है, जिसके कारण तेज जांच और प्रभावी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
यह भ्रष्टाचार का गंभीर प्रकरण है जो प्रशासन और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। शिकायत के बाद उचित जांच की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके और भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने में मदद मिले।
इस प्रकार, एसडीएम कार्यालय में पुनर्मतगणना हेतु आवेदन आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत की मांग व चुनाव जीत का आश्वासन देने का मामला व्यापक चर्चा में है, जो प्रशासन की जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई के लिए दबाव बढ़ाएगा।
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