Ram Navami 2026, Hanuman Palki Yatra:- राम नवमी पर पूरी रात जागी आस्था, पालकी में विराजे हनुमानजी अष्टमी से दशमी भोर तक चली सदियों पुरानी परंपरा रात 11 बजे मशालों के बीच निकली भव्य शोभायात्रा,

जानिए किसने किया था परंपरा की शुरुआत…
Ram Navami 2026, Hanuman Palki Yatra:-राम नवमी के अवसर पर अष्टमी से दशमी की भोर तक हनुमानजी की सदियों पुरानी परंपरागत यात्रा श्रद्धा और भव्यता के साथ संपन्न हुई। अष्टमी को रामटेकरी से करैयापारा लाकर विश्राम कराने के बाद नवमी की रात 11 बजे मशालों और जयघोष के बीच शोभायात्रा निकली, जो पूरी रात नगर भ्रमण कर दशमी की सुबह पुनः रामटेकरी पहुंची। आयोजन में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने परंपरा को जीवंत बनाए रखा।

Ratanpur रतनपुर । रतनपुर में राम नवमी सिर्फ एक त्योहार नहीं… एक विरासत है। एक ऐसी परंपरा, जो अष्टमी से शुरू होकर दशमी की भोर तक पूरे नगर को एक सूत्र में बांधे रखती है। मशालों की रोशनी, जयघोष और आस्था के बीच हनुमानजी की भव्य शोभायात्रा इस साल भी उसी गरिमा के साथ निकली।
अष्टमी के दिन हनुमानजी को रामटेकरी मंदिर से विधिवत पूजा–अर्चना के बाद करैयापारा स्थित मालगुजार बाड़े में लाया जाता है। यहीं रात में उनका विश्राम होता है। पूरी रात भजन, कीर्तन और सेवा में डूबे श्रद्धालु इस परंपरा को निभाते नहीं… उसे जीते हैं।

और फिर… नवमी की रात।
घड़ी में जैसे ही 11 बजते हैं, करैयापारा से एक आस्था का कारवां निकल पड़ता है। पालकी में विराजे हनुमानजी… आगे–आगे मशालें, साथ में मचल की गूंज, ढोल–नगाड़ों की थाप और “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारे।
यह यात्रा रुकती नहीं… थमती नहीं… पूरी रात चलती है। हर गली, हर चौक इस आस्था का साक्षी बनता है।

और जब सुबह की पहली किरण दस्तक देती है… दशमी की भोर में यही कारवां रामटेकरी मंदिर पहुंचता है। पूजा–अर्चना के बाद हनुमानजी को फिर उनके स्थान पर स्थापित कर दिया जाता है।
जनश्रुति के अनुसार, इस ऐतिहासिक परंपरा की शुरुआत रतनपुर के तत्कालीन शासक राजा भीमा जी राव भोंसले द्वारा की गई थी। वर्तमान में भी स्थानीय समिति और नगरवासियों के सहयोग से यह परंपरा उसी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जा रही है।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि बुजुर्गों के साथ–साथ युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। परंपरा को सहेजने और आगे बढ़ाने में युवाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है, जिससे यह आयोजन और अधिक व्यवस्थित व भव्य स्वरूप लेता जा रहा है।

कंधों पर जिम्मेदारी… हाथों में मशाल… और दिल में आस्था।
धार्मिक आस्था के साथ–साथ यह आयोजन रतनपुर की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का भी प्रतीक बनकर उभरा।
यही वजह है कि रतनपुर में राम नवमी सिर्फ मनाई नहीं जाती… हर साल महसूस की जाती है।

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