छत्तीसगढ़ में सामाजिक बदलाव,ग्रामीण भारत के लिए मिसाल हिंसा व विवादों की भुमि कुटरा बना शिक्षा और स्वास्थ्य का मांडल ग्राम

हिंसा व विवादों की भुमि कुटरा बना शिक्षा और स्वास्थ्य का मांडल ग्राम ।
ग्राम कुटरा, जो कभी हिंसा, अतिक्रमण और विवादों के लिए जाना जाता था, आज शिक्षा और स्वास्थ्य का मांडल बन चुका है। गांव के बच्चे डॉक्टर, जज और सीऐ जैसे प्रतिष्ठित पदों पर है। ग्रामीणों ने स्वयं आगे बढ़कर अतिक्रमण हटाया। यहां मेडिकल काॅलेज का निर्माण हो रहा है। यह बदलाव प्रशासनिक पहल का परिणाम नहीं बल्कि भूमिदान और सामाजिक एकता से आया है ।
गांव में स्कूल एक सपना था।
वर्ष 2008 में कुटरा को हाईस्कूल की स्वीकृति मिली। लेकिन गांव में लंबे समय से जारी सामाजिक तनाव और भूमि विवाद के कारण अगले छह वर्षों तक स्कूल भवन का निर्माण नहीं हो सका। स्थिति इतनी गंभीर थी कि प्रशासन को स्कूल को किसी अन्य गांव में स्थानांतरित करने का विचार करना पड़ा इस नाज़ुक समय में ग्रामीणों के आग्रह पर कुटरा मालगुजार से जुड़े राघवेन्द्र रामसरकार पाण्डेय ने साल 2014 में अपनी पैतृक निजी तालाब से लगी भुमि पर हाईस्कूल की नींव रखी। वर्तमान जहां रामसरकार शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल का भवन खड़ा है, उस भुमि में पुर्व में हिंसक विवाद में लोगों ने जान गंवाई थी,अनेक लोग जेल गये थे । यहां स्कूल की स्थापना सामाजिक दायित्व वह उदाहरण है जो बहुत कम देखने-सुनने को मिलता है।
सामाजिक बदलाव
राघवेन्द्र पाण्डेय की पहल ने केवल शिक्षा का मार्ग खोला ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की मिसाल भी कायम की। उनके द्वारा कुथुर गांव में पिता की स्मृति में आंगनबाड़ी और सामुदायिक भवन निर्माण हेतु भूमि दान किया गया। वर्तमान में जहां एक-एक ईंच जमीन के लिए विवाद की स्थिति निर्मित हो जा रही है एैसे दौर में पैतृक भुमि दान करना अनुकरणीय और समाज को प्रेरणा देने वाला सहासिक कदम माना जा रहा है, इस पहल से प्रेरित ग्रामीणों ने स्वयं आगे बढ़कर सैकड़ों एकड़ शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाया।
बालिका शिक्षा और युवा विकास
पहले कुटरा में आठवीं कक्षा के बाद बालिकाओं की पढ़ाई लगभग ठप हो जाती थी। हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना के बाद बच्चों, विशेषकर बालिकाओं, के लिए उच्च शिक्षा के अवसर खुले। आज कुटरा के छात्र-छात्राएं जज, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और प्रशासनिक पदों पर कार्य कर रहे हैं।
बदलाव ग्रामीण भारत के लिए मिसाल।
कुटरा में अतिक्रमण हटाया जाना किसी प्रशानिक कार्यवाही से नही बल्कि राघवेन्द्र पाण्डेय के आग्रह पर स्वेच्छा से लिया गया सामाजिक सहमति था। अब कुटरा में कन्या छात्रावास, अस्पताल, नर्सिंग और मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थानों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। यह बदलाव न केवल कुटरा, बल्कि छत्तीसगढ़ सहीत पूरे ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणा बन चुका है।

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