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अफ़सर का सफ़र, Nyaydhani की नज़र कलम की ताक़त, कुर्सी की डगर… इस बार पढ़िए IPSAnshikaJain का संघर्षभरा सफ़र…महज 5 साल की उम्र में सिर से उठ गया था माता-पिता का साया, लेकिन दादी के सपनों ने उन्हें टूटने नहीं दिया…

IPS Anshika Jain Biography:- महज पाँच वर्ष की उम्र में मातापिता का साया सिर से उठ गया, पर अंशिका जैन ने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी।दादी के सपनों को जीवन का ध्येय बनाकर उन्होंने संघर्ष की राह चुनी।दिल्ली की गलियों में पलीबढ़ी इस बेटी ने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा संबल बनाया।नौकरी का आकर्षक अवसर भी उन्होंने त्याग दिया, क्योंकि लक्ष्य सिविल सेवा था।असफलताओं के कई दौर आए, मगर उनके संकल्प की लौ कभी मंद नहीं पड़ी।अंततः पाँचवें प्रयास में UPSC 2022 में 306वीं रैंक हासिल कर उन्होंने आईपीएस की वर्दी पाई। आज वे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में सेवा की राह पर अग्रसर हैं।रतनपुर थाने की जिम्मेदारी संभालते हुए उनका संघर्ष अब समाज की सेवा में रूपांतरित हो रहा है।

IPS Anshika Jain Biography:-बिलासपुर। संघर्ष से निकली कहानियां अक्सर प्रेरणा बन जाती हैं। अंशिका जैन की सफ़र भी कुछ ऐसी ही है। बचपन में ही मातापिता का साया सिर से उठ गया, लेकिन दादी के सपनों और परिवार के सहारे उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा पास की और आज छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। हाल ही में उन्हें रतनपुर थाने की कमान सौंपी गई है।

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पांच साल की उम्र में सिर से उठ गया मातापिता का साया

दिल्ली में पलीबढ़ीं अंशिका जैन ने महज पांच वर्ष की उम्र में अपने मातापिता दोनों को खो दिया था। इतनी छोटी उम्र में आए इस गहरे आघात ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी, लेकिन यहीं से उनके संघर्ष की असली कहानी शुरू हुई। दादी और चाचा ने उन्हें टूटने नहीं दिया। दादी ने जहां शिक्षा और मूल्यों की नींव रखी, वहीं चाचा ने पिता की तरह हर मोड़ पर उनका हाथ थामे रखापढ़ाई से लेकर करियर के फैसलों तक।
दादी का सपना था कि उनकी पोती एक दिन सिविल सेवक बने और समाज के लिए काम करे। चाचा ने उस सपने को अपना लक्ष्य बना लिया और अंशिका को लगातार प्रेरित करते रहे। कठिन परिस्थितियों में भी परिवार का यही सहारा अंशिका की सबसे बड़ी ताकत बना। दादी की सीख और चाचा के भरोसे ने उन्हें हर मुश्किल से लड़ने का हौसला दियाऔर आखिरकार वही सपना सच हुआ, जब अंशिका जैन आईपीएस अधिकारी बन गईं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई

अंशिका ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने एम.कॉम के साथसाथ यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।

ग्रेजुएशन के बाद उन्हें एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी का अवसर मिला, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता देते हुए नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।

दादी के निधन के बाद भी नहीं छोड़ा सपना

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साल 2019 अंशिका जैन के जीवन का सबसे कठिन दौर रहा। इसी वर्ष उनकी दादी का निधन हो गया, जो बचपन से ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा और सहारा थीं। दादी ही उन्हें पढ़ाई का महत्व समझाते हुए अक्सर सिविल सेवा में जाने के लिए प्रेरित करती थीं। उनके जाने के बाद अंशिका को गहरा झटका लगा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से पीछे हटने के बजाय खुद को संभालते हुए तैयारी जारी रखी।

इस चुनौतीपूर्ण समय में उनके चाचा ने भी अहम भूमिका निभाई। मातापिता के निधन के बाद से ही चाचा ने अभिभावक की तरह उनका साथ दिया और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। पढ़ाई से लेकर जीवन के फैसलों तक उन्होंने अंशिका का मार्गदर्शन किया और उन्हें कभी हार मानने की सीख दी। दादी का सपना और चाचा का भरोसा ही अंशिका के लिए सबसे बड़ी ताकत बना, जिसने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

रणनीति बदली और तैयारी को दिया नया रूप

तैयारी के शुरुआती दौर में उनकी रणनीति स्पष्ट नहीं थी। बाद में उन्होंने अपनी पढ़ाई के तरीके में बदलाव किया और परीक्षा के तीनों चरणों के लिए अधिक से अधिक मॉक टेस्ट देने पर ध्यान केंद्रित किया।

ऑप्शनल विषय के तौर पर उन्होंने कॉमर्स और अकाउंटेंसी को चुना, क्योंकि इन विषयों में उनकी स्वाभाविक रुचि और शैक्षणिक आधार मजबूत था।

पांचवें प्रयास में मिली सफलता

लगातार प्रयासों के बाद अंशिका को सफलता मिली। उन्होंने UPSC CSE 2022 में 306वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए चयनित हुईं।पांचवें प्रयास में मिली यह सफलता उनके धैर्य, मेहनत और मजबूत संकल्प की मिसाल है।

इंटरव्यू में भी छोड़ी अलग पहचान

अंशिका बचपन से ही ग्रैटिट्यूड जर्नलिंग करती रही हैं। साक्षात्कार के दौरान पैनल इस आदत से प्रभावित हुआ और उनसे इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।

अब बिलासपुर में संभाल रहीं रतनपुर थाने की जिम्मेदारी

वर्तमान में प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी के रूप में अंशिका जैन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रशिक्षण ले रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें रतनपुर थाने का प्रभारी बनाया गया है, जहां वे मैदानी पुलिसिंग का अनुभव लेते हुए कानूनव्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

रतनपुर क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जहां सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में यहां की कानूनव्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए अहम जिम्मेदारी मानी जाती है।

संघर्ष से सेवा तक का सफर

अंशिका जैन की कहानी संघर्ष, परिवार के विश्वास और मजबूत इरादों की मिसाल है। दादी के सपनों और चाचा के मार्गदर्शन ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की ताकत दी। लगातार प्रयास और धैर्य के साथ उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की। आज रतनपुर थाने की कमान संभालते हुए वे मैदानी पुलिसिंग का अनुभव ले रही हैं। अपनी कार्यशैली और प्रतिबद्धता के जरिए वे यह साबित कर रही हैं कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन और मजबूत संकल्प के सामने कोई भी चुनौती ज्यादा देर तक टिक नहीं सकती।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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