CG NEWS युवाओं को रोजगार नहीं, किसान बदहाली में; बजट पर मोतीलाल देवांगन का हमला: सरकार ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आम बजट 2026 को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता मोतीलाल देवांगन ने बजट को देश की वास्तविक आर्थिक चुनौतियों से आंख मूंदने वाला करार देते हुए कहा कि सरकार युवाओं, किसानों और आम नागरिकों की पीड़ा से पूरी तरह अनजान है।
रायपुर: केंद्रीय बजट 2026 पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेता मोतीलाल देवांगन की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि यह बजट भारत के सामने खड़े गहरे आर्थिक और सामाजिक संकटों को नजरअंदाज करता है। मोतीलाल देवांगन ने युवाओं की बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और गिरती आर्थिक गतिविधियों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने वास्तविक समस्याओं को सुलझाने के बजाय आंकड़ों की बाज़ीगरी पर भरोसा किया है।
उन्होंने कहा कि देश का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, विनिर्माण क्षेत्र लगातार कमजोर हो रहा है, निवेशक भारत से पूंजी निकाल रहे हैं, घरेलू बचत में गिरावट आ रही है और किसान कर्ज व लागत के बोझ तले दबे हुए हैं। इसके बावजूद बजट में इन मुद्दों पर कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता।
मोतीलाल देवांगन ने आरोप लगाया कि सरकार आने वाले वैश्विक आर्थिक झटकों और आंतरिक आर्थिक अस्थिरता को लेकर पूरी तरह उदासीन बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा बजट है, जिसमें समस्याओं को दुरुस्त करने की बजाय उन पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है।
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करते हुए पूंजीगत व्यय का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की, जो चालू वित्त वर्ष में 11.2 लाख करोड़ रुपये था। सरकार ने बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए कई योजनाओं का भी ऐलान किया है।
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में तीन ‘कर्तव्यों’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ये न केवल अर्थव्यवस्था को गति देंगे, बल्कि गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों को सशक्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह ‘कर्तव्य भवन’ में पेश किया गया पहला बजट है और सरकार अपने संकल्पों के प्रति प्रतिबद्ध है। उल्लेखनीय है कि निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं, जिन्होंने लगातार नौवीं बार संसद में बजट पेश किया है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि बड़े दावों के बावजूद बजट आम जनता की जमीनी परेशानियों को संबोधित करने में विफल रहा है।

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