छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपादेश - विदेशभ्रष्टाचारराज्य एवं शहर

CG Corruption News:- क्या अब भी बिक रहा प्रमोशन? 50 पदों की सूची से पहले गरमाया मामला! शिक्षा विभाग में पदोन्नति का ‘रेट कार्ड’ वायरल, कर्मचारियों में हड़कंप! क्या ? पदोन्नति से पहले ही‘डील’ सिस्टम पर सवाल!

CG Corruption News:- जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। लगभग 50 पदों पर प्रस्तावित पदोन्नति के बीच आरोप हैं कि कर्मचारियों से 40 से 50 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। बताया जा रहा है कि पदोन्नति के साथ मनचाही पदस्थापना का भी प्रलोभन दिया जा रहा है, जिससे विभाग में असंतोष बढ़ गया है। यह कार्यालय पहले भी फर्जी शिक्षाकर्मियों से कथित वसूली, अपात्रों को अनुकंपा नियुक्ति, मनचाही पदस्थापना और प्रश्नपत्र छपाई में अनियमितताओं जैसे विवादों में घिर चुका है। अब सभी की निगाहें जारी होने वाली पदोन्नति सूची पर टिकी हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने सकते हैं।

JanjgirChampa जांजगीरचांपा। शिक्षा, जिसे समाज का सबसे पवित्र क्षेत्र माना जाता है, यदि उसी के भीतर पदोन्नति के नाम पर सौदेबाजी की चर्चा होने लगे, तो यह सिर्फ एक विभागीय विवाद नहीं रह जातायह व्यवस्था के चरित्र पर सवाल बन जाता है। जांजगीरचांपा के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से इन दिनों ऐसी ही खबरें छनकर सामने रही हैं।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

सूत्रों के अनुसार, जिले के शासकीय हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। भृत्य से सहायक ग्रेड-3, सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 और कनिष्ठ लेखा परीक्षक से वरिष्ठ लेखा परीक्षक तक लगभग 50 पदों पर पदोन्नति की तैयारी की जा रही है। दावा है कि एक सप्ताह के भीतर सूची जारी हो सकती है। लेकिन सूची आने से पहले ही फुसफुसाहटों ने एक गंभीर रूप ले लिया है।

पदोन्नति के नाम पररेटतय होने के आरोप

कहा जा रहा है कि एकएक पद के लिए 40 से 50 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। आरोप है कि कार्यालय के कुछ कर्मचारी और कर्मचारी संगठनों से जुड़े लोग इस कथित खेल में सक्रिय हैं। पात्र कर्मचारियों को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि यदि वे तय रकम खर्च करें, तो केवल पदोन्नति मिलेगी बल्कि मनचाही पदस्थापना भी सुनिश्चित की जाएगी।

सवाल यह हैक्या अब पदोन्नति भी योग्यता से नहीं, बल्कि भुगतान से तय होगी?

पहले भी विवादों में रहा है कार्यालय

यह पहला अवसर नहीं है जब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय चर्चा में आया हो। इससे पहले फर्जी शिक्षाकर्मियों से कथित मासिक वसूली की खबरें सामने आई थीं। आरोप लगे थे कि अपात्र लोग वर्षों से सेवा में बने रहे और कार्रवाई के बजाय उनसे नियमित रूप से वसूली होती रही। हालांकि, इन आरोपों पर कोई ठोस और सार्वजनिक कार्रवाई सामने नहीं आई।

  CG Crime News:– जिले में तीन अलग-अलग स्थानों पर भ्रूण और नवजात शिशुओं के शव मिलने से मचा हड़कंप, पुलिस ने की जांच शुरू

कॉल कर कार्यालय बुलाकर कथितरेटऔर पदोन्नति की जानकारी देने

सूची में शामिल कुछ कर्मचारियों ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें कार्यालय से बुलावा आया। वे गए भी। वहां उनसे सिर्फ औपचारिक बातचीत नहीं हुई, बल्कि कथित तौर पर पदोन्नति की प्रक्रिया और उससे जुड़ीव्यवस्थाको समझाया गया। कर्मचारियों का दावा है कि उसी बातचीत में उन्हें कथितरेटऔर पदोन्नति से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई। यह दावा कितना सच है, यह जांच का विषय है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने विभाग के भीतर एक अजीबसा माहौल जरूर बना दिया है

अनुकंपा नियुक्ति और पदस्थापना पर भी उठे सवाल

शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर भी कई बार विवाद सामने चुके हैं। आरोप लगे कि पात्रता की अनदेखी कर नियमों के विपरीत नियुक्तियां दी गईं। वहीं मनचाही पदस्थापना के लिए भी लंबे समय से लेनदेन की चर्चाएं होती रही हैं। विभागीय स्तर पर इन आरोपों को कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन चर्चा कभी थमी नहीं।

अपात्रों को पदोन्नति देने के आरोप

पूर्व में वरिष्ठता और पात्रता को दरकिनार कर पदोन्नति देने के आरोप भी लगे थे। इससे कई योग्य कर्मचारी वंचित रह गए और उन्होंने असंतोष जताया। यह असंतोष अब एक बार फिर उभरता दिखाई दे रहा है।

प्रश्न पत्र छपाई पर भी उठे थे सवाल

हाल ही में कक्षा पहली से 11वीं तक के प्रश्न पत्रों की छपाई को लेकर भी विवाद सामने आया था। स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस को दरकिनार कर दूसरे राज्य से छपाई कराने और निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठे थे।

अब सबकी निगाहें पदोन्नति सूची पर

फिलहाल, शिक्षा विभाग की प्रस्तावित पदोन्नति सूची चर्चा के केंद्र में है। यदि अवैध वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हैं या नहीं।

क्योंकि सवाल सिर्फ पदोन्नति का नहीं है
सवाल उस व्यवस्था का है, जो बच्चों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाने का दावा करती है।

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

Related Articles

Back to top button