Bastar News:- OTP मांगने वाला हो या Digital Arrest का डर दिखाने वाला… सावधान! बस्तर पुलिस ने व्यापारियों को दी साइबर ठगों की पूरी कुंडली

Bastar News:- फोन बजा… सामने से KYC अपडेट करने की बात हुई। फिर आया एक लिंक, एक OTP और देखते ही देखते खाते से रकम गायब। कहीं निवेश में मोटे मुनाफे का लालच, तो कहीं Digital Arrest का डर। साइबर ठगों का खेल लगातार बदल रहा है और इसी बदलते खेल के बीच बस्तर पुलिस ने कारोबारियों को साइबर सुरक्षा का पाठ पढ़ाया। 
जगदलपुर। साइबर ठग अब सिर्फ फोन कर OTP नहीं मांगते, बल्कि KYC अपडेट, फर्जी लिंक, निवेश का लालच और Digital Arrest जैसे नए हथकंडों से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे ही साइबर फ्रॉड से व्यापारियों और कारोबारियों को बचाने बस्तर पुलिस ने मोर्चा संभाला। “साइबर जागृति अभियान” के तहत बस्तर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, जगदलपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर व्यापारियों को ठगी के तरीके और उससे बचने के उपाय बताए गए।
कार्यक्रम में चैंबर के पदाधिकारी और सदस्य, रोटरी क्लब के सदस्य तथा अलग-अलग व्यावसायिक एवं वाणिज्यिक संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने कारोबार में डिजिटल लेनदेन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से चर्चा की।
OTP से शुरू होता है खेल, खाते से उड़ जाती है रकम। 
साइबर पुलिस थाना निरीक्षक गौरव तिवारी ने साइबर अपराध के अलग-अलग तरीकों की जानकारी देते हुए बताया कि संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। ठगी होने की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल बैंक को सूचना देने और पुलिस से संपर्क करने की जरूरत है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने डिजिटल लेनदेन में सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि OTP, PIN, CVV और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
Digital Arrest का डर… निवेश का लालच… पुलिस ने खोले ठगों के पत्ते
नगर पुलिस अधीक्षक सुमितकुमार धोत्रे ने व्यापारियों को OTP/KYC फ्रॉड, Digital Arrest, निवेश और ट्रेडिंग फ्रॉड, फर्जी लिंक तथा सोशल मीडिया फ्रॉड के बारे में जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि साइबर अपराधी भरोसा जीतने, डर पैदा करने या ज्यादा मुनाफे का लालच देने के बाद लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।
व्यापारियों ने पूछे सवाल, SP ने दिया जवाब
कार्यक्रम में सिर्फ पुलिस की समझाइश ही नहीं हुई, बल्कि व्यापारियों ने साइबर अपराध से जुड़े सवाल भी पूछे। पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने चैंबर सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए व्यापारिक संस्थानों की वित्तीय और डिजिटल सुरक्षा में सतर्कता की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में कारोबार जितना ऑनलाइन हो रहा है, साइबर सुरक्षा उतनी ही जरूरी होती जा रही है। थोड़ी सी लापरवाही से बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
छत्तीसगढ़ पुलिस का सात सप्ताह का साइबर जागृति अभियान 15 अगस्त से 2 अक्टूबर, गांधी जयंती तक चलाया जा रहा है। पहले चरण में स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों को जागरूक किया गया, जबकि मौजूदा चरण में बैंक, वित्तीय संस्थान और व्यावसायिक समुदाय अभियान के केंद्र में हैं।

पुलिस का सीधा मंत्र—रुको, सोचो और फिर एक्शन लो
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने तीन शब्दों का आसान मंत्र दिया—“रुको, सोचो, एक्शन लो।”
रुको—संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें।
सोचो—OTP, PIN, CVV और पासवर्ड किसी को न बताएं।
एक्शन लो—ठगी होते ही बैंक को सूचना दें और तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
साइबर ठगों के लिए सबसे बड़ा हथियार आपकी जल्दबाजी है और उनके खिलाफ सबसे बड़ी ढाल आपकी सतर्कता। बस्तर पुलिस का संदेश भी साफ है—डिजिटल दुनिया में एक क्लिक से पहले रुकिए, सोचिए और तभी आगे बढ़िए।
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