CG News:- राखी बनी साइबर कवच! कैदियों के हाथों से बनी राखी, 1.65 लाख कलाई पर बंधा जागरूकता का धागा; जानिए इस जिले की पुलिस ने कैसे रचा अनोखा विश्व रिकॉर्ड, क्या है इसके पीछे की कहानी

CG News:- रक्षाबंधन पर राखी बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है। इस छोटे से धागे में सुरक्षा, भरोसे और जिम्मेदारी का बड़ा भाव छिपा होता है। जांजगीर-चांपा पुलिस ने इसी भाव को डिजिटल दौर के नए खतरे—साइबर अपराध—से जोड़ते हुए ‘एक राखी साइबर जागृति की’ अभियान चलाया। महज एक घंटे में 1,65,399 लोगों की कलाई पर साइबर जागरूकता की राखी बांधी गई। एसपी विजय कुमार पाण्डेय की पहल पर एक सप्ताह की तैयारी के बाद 550 लोगों की टीम ने 432 गांवों और शहरी क्षेत्रों में एक साथ मोर्चा संभाला। अभियान में ग्राम कोटवार, महिला कमांडो और स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों ने सहयोग किया, जबकि जिला जेल के कैदियों और महिला स्व-सहायता समूहों ने राखियां तैयार कीं। पुलिस के अनुसार, यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया में इस तरह का पहला रिकॉर्ड है, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। रिकॉर्ड दर्ज होने पर कलेक्टर जन्मेजय ने एसपी विजय कुमार पाण्डेय को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

जांजगीर–चांपा। रक्षाबंधन पर हर साल बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। धागा छोटा होता है, लेकिन उसके पीछे छिपा भाव बहुत बड़ा—सुरक्षा का भरोसा। जांजगीर–चांपा पुलिस ने इसी भावना को इस बार डिजिटल दुनिया की सुरक्षा से जोड़ दिया। जिले में ‘एक राखी साइबर जागृति की’ नाम से ऐसा अभियान चलाया गया, जिसमें महज एक घंटे में 1,65,399 लोगों की कलाई पर साइबर जागरूकता की राखी बांधी गई। अभियान 432 गांवों और शहरी क्षेत्रों में एक साथ शुरू हुआ। बड़े पैमाने पर हुए इस अभियान का सत्यापन गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ने किया और इसे विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
लेकिन इस रिकॉर्ड की असली कहानी उस एक घंटे में नहीं, बल्कि उसके पीछे की गई एक सप्ताह की तैयारी में छिपी है।
रिकॉर्ड दर्ज होने पर कलेक्टर जन्मेजय ने एसपी को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
सात दिन पहले एसपी ने शुरू कर दी थी तैयारी
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने अभियान को सामान्य जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय इसे जिलेभर में एक साथ करने की योजना बनाई। इसके लिए करीब एक सप्ताह पहले से तैयारियां शुरू कर दी गईं।
सबसे बड़ी चुनौती थी—इतने बड़े क्षेत्र में एक ही समय पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचना।
इसके लिए राखियां तैयार कराने, उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने, टीमों को गांवों में भेजने और निर्धारित समय पर सभी जगह गतिविधियां शुरू कराने की पूरी कार्ययोजना तैयार की गई।
550 लोगों की टीम ने संभाला मोर्चा
एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने अभियान के लिए करीब 550 लोगों की टीम तैयार की। टीमों को जिले के अलग–अलग गांवों और क्षेत्रों में भेजा गया, ताकि अभियान शुरू होने के समय हर टीम अपने निर्धारित स्थान पर मौजूद रहे।
अभियान में ग्राम कोटवार, महिला कमांडो और स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों ने भी सहयोग किया। इस स्थानीय नेटवर्क की वजह से पुलिस की टीमें गांवों के भीतर तक पहुंच सकीं।
यानी एक तरफ जिले का पुलिस नेटवर्क था, दूसरी तरफ गांवों का स्थानीय सहयोग—और दोनों को एक साथ जोड़कर अभियान को बड़े स्तर पर उतारा गया।
घड़ी ने समय बताया और पूरे जिले में एक साथ शुरू हुआ अभियान
इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था—एक साथ शुरुआत।
अलग-अलग गांवों में पहले से पहुंच चुकी टीमें तय समय का इंतजार कर रही थीं। जैसे ही निर्धारित समय आया, 432 गांवों सहित शहरी क्षेत्रों में एक साथ ‘साइबर जागृति की राखी’ बांधने का अभियान शुरू हो गया।कहीं पुलिसकर्मी लोगों की कलाई पर राखी बांध रहे थे, कहीं महिला कमांडो अभियान का संदेश दे रही थीं और कहीं ग्राम स्तर के लोग टीम के साथ लोगों को जागरूक कर रहे थे।यह दृश्य किसी एक आयोजन का नहीं था। जिले के अलग-अलग हिस्सों में एक ही समय पर चल रही गतिविधियों का था।

राखी बनाने में जेल के कैदी और महिला स्व-सहायता समूह भी जुड़े
अभियान की एक खास बात यह रही कि राखियों की तैयारी में जिला जेल के कैदियों और महिला स्व–सहायता समूहों को भी शामिल किया गया।
इनके द्वारा बड़ी संख्या में राखियां तैयार की गईं। फिर इन्हें अभियान में शामिल टीमों के माध्यम से जिले के अलग-अलग गांवों और शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाया गया।इस तरह अभियान का संदेश सिर्फ कलाई तक नहीं पहुंचा, बल्कि इसके निर्माण और क्रियान्वयन में भी समाज के अलग–अलग वर्ग जुड़े।
एक घंटे में 1,65,399 लोगों की कलाई पर राखी
एक घंटे का अभियान खत्म हुआ तो आंकड़ा सामने आया—1,65,399 लोग।
यानी 60 मिनट में 1 लाख 65 हजार 399 लोगों तक साइबर जागरूकता का संदेश पहुंचा।
अलग–अलग क्षेत्रों से सामने आए आंकड़े इस अभियान के विस्तार की पूरी तस्वीर पेश करते हैं
क्षेत्र संख्या
जांजगीर-नैला 36,544
बिर्रा-करही 6,464
पंतोरा 4,120
अकलतरा-कोटमी 18,724
बलौदा 10,909
राहौद 4,866
शिवरीनारायण 16,395
पामगढ़ 10,546
बम्हनीडीह 3,823
मुलमुला 24,828
सरागांव 6,500
नवागढ़ 12,169
चांपा 9,511
कुल 1,65,399
यह संख्या बताती है कि अभियान को जिले के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रखा गया था। अलग–अलग क्षेत्रों में एक साथ टीमें सक्रिय थीं।
राखी बांधकर सिर्फ फोटो नहीं, साइबर सुरक्षा की बात भी हुई
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि राखी बांधना ही इसका उद्देश्य नहीं था। हर राखी के साथ लोगों को साइबर अपराध से बचने की जानकारी दी गई।
लोगों को बताया गया कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें। किसी अजनबी कॉल पर OTP, बैंक खाते की जानकारी या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं और ऑनलाइन लेन–देन करते समय सावधानी बरतें।
पुलिस ने यह भी समझाया कि साइबर ठगी का शिकार होने के बाद चुप बैठने या देर करने के बजाय तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए।
रक्षाबंधन के भाव को डिजिटल सुरक्षा से जोड़ा
राखी का मतलब ही है—सुरक्षा, भरोसा और जिम्मेदारी।

पुलिस ने इसी भाव को साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता में बदलने की कोशिश की। जिस तरह भाई-बहन एक-दूसरे की सुरक्षा का संकल्प लेते हैं, उसी तरह लोगों को अपनी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश दिया गया।
आज साइबर अपराध का तरीका बदल चुका है। ठगी हमेशा किसी सुनसान रास्ते पर नहीं होती। कई बार एक फोन कॉल, एक मैसेज, एक लिंक या एक फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर दिया जाता है।
इसी खतरे को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ने किया सत्यापन
अभियान के इतने बड़े पैमाने पर होने के कारण इसके सत्यापन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण थी। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की छत्तीसगढ़ राज्य प्रभारी सोनल राजेश शर्मा अभियान के दौरान मौजूद रहीं।
जिलेभर में चल रही गतिविधियों और उपलब्ध आंकड़ों का सत्यापन किया गया। इसके बाद अभियान की उपलब्धि को रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया गया।कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।
रिकॉर्ड के पीछे दिखी टीमवर्क की तस्वीर

किसी रिकॉर्ड का श्रेय सिर्फ एक व्यक्ति को देना आसान है, लेकिन इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों की भूमिका रही। एसपी की योजना से शुरुआत हुई। करीब 550 लोगों की टीम मैदान में उतरी। ग्राम कोटवार, महिला कमांडो और स्थानीय लोगों ने सहयोग किया। जेल के कैदियों और महिला स्व–सहायता समूहों ने राखियां तैयार कीं। जिले के 432 गांवों और शहरी क्षेत्रों में टीमें पहुंचीं।
फिर एक तय समय पर सभी जगह अभियान शुरू हुआ और एक घंटे में 1,65,399 लोगों तक पहुंच बनाई गई।
एक राखी, लेकिन संदेश पूरे समाज के नाम

जांजगीर–चांपा पुलिस का यह अभियान इसलिए भी अलग दिखाई देता है क्योंकि इसमें रक्षाबंधन की भावना को साइबर सुरक्षा जैसे गंभीर विषय से जोड़ा गया।
कलाई पर बंधी राखी लोगों को यह याद दिलाती रही कि सुरक्षा सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। आज मोबाइल, बैंक खाता, सोशल मीडिया और डिजिटल पहचान की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
एक सप्ताह की तैयारी के बाद आया वह एक घंटा अब रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुका है।
432 गांवों में एक साथ शुरुआत।
550 लोगों की टीम का मैदान में उतरना।
और एक घंटे में 1,65,399 कलाई पर ‘साइबर जागृति की राखी’।
राखी का धागा छोटा था, लेकिन संदेश बड़ा—साइबर ठगों से बचना है तो सबसे पहले जागरूक होना होगा।
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