CG News:- धान के कटोरे में अफीम की खेती? भाजपा कार्यालय घेरने पहुंची कांग्रेस, लेकिन भीड़ ने ही खोल दी सियासत की हकीकत

CG News:- कथित अफीम खेती के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर प्रदेश को “उड़ता छत्तीसगढ़” बनाने का आरोप लगाया और दुर्ग के समोदा गांव में 10 एकड़ में अफीम खेती की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश में पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझपटी भी हुई, हालांकि प्रदर्शन में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी।
janjgir जांजगीर–चांपा। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक सवाल गूंज रहा है—क्या “धान का कटोरा” अब नशे की खेती का नया ठिकाना बनता जा रहा है? इसी सवाल को लेकर कांग्रेस सड़कों पर उतरी और भाजपा कार्यालय का घेराव किया। लेकिन विरोध के इस प्रदर्शन में भीड़ की कमी ने खुद आंदोलन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए।
कांग्रेस के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन का नेतृत्व राजेश अग्रवाल ने किया। उनका आरोप है कि राज्य में अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद सरकार चुप्पी साधे बैठी है।
“धान का कटोरा” या “उड़ता छत्तीसगढ़”?
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ को कभी देश का “धान का कटोरा” कहा जाता था, लेकिन अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि प्रदेश को “उड़ता छत्तीसगढ़” कहा जाने लगा है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि दुर्ग जिले के समोदा गांव में करीब 10 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती का मामला सामने आया है और इसमें भाजपा से जुड़े एक पदाधिकारी का नाम भी चर्चा में है।
प्रशासन पर भी उठे सवाल
कांग्रेस नेताओं ने यह सवाल भी उठाया कि जब हर साल खेतों की गिरदावरी होती है और धान खरीदी के समय प्रशासनिक जांच होती है, तो इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती आखिर प्रशासन की नजर से कैसे बच गई।
उनका कहना है कि अगर यह सच है तो यह सिर्फ खेती का मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की बड़ी विफलता का संकेत है।
भाजपा कार्यालय के बाहर हंगामा
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय की ओर बढ़े। पुलिस ने पहले से ही बैरिकेडिंग कर रखी थी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, जिससे पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझपटी की स्थिति बन गई।
नारेबाजी के बीच विरोध तो हुआ, लेकिन भीड़ उतनी नहीं थी जितनी इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए अपेक्षित थी।
सवाल अभी भी बाकी हैं
अफीम की कथित खेती का मामला सामने आने के बाद राजनीति जरूर गरमा गई है, लेकिन असली सवाल अब भी वहीं खड़ा है—अगर सचमुच 10 एकड़ में अफीम उगाई गई, तो क्या यह सिर्फ एक खेत की कहानी है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क छिपा है?
यह सवाल फिलहाल राजनीति के मंच पर है, लेकिन जवाब प्रशासन और जांच एजेंसियों को देना होगा।

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