CG News:- क्या कोल वॉशरी विस्तार से पहले पर्यावरण, पानी और लोगों की सेहत से जुड़े सवालों के जवाब मिलेंगे?53 आपत्तियों के बीच उठी मांग—जांच पूरी हुए बिना आखिर मंजूरी की इतनी जल्दबाज़ी क्यों?

CG News:- आज विश्व पर्यावरण दिवस है। एक तरफ पर्यावरण बचाने की बातें हो रही हैं, दूसरी तरफ जांजगीर–चांपा में एक कोल वॉशरी विस्तार परियोजना को लेकर 53 सवाल खड़े किए गए हैं। सवाल हवा का है, पानी का है, गांवों की सेहत का है और उन लोगों का है जो इस परियोजना के आसपास रहते हैं। भारतीय जनाधिकार पार्टी ने जांच पूरी होने तक मंजूरी रोकने की मांग की है। अब सवाल यह नहीं है कि परियोजना कितनी बड़ी होगी, सवाल यह है कि क्या विकास की फाइलों में दर्ज आंकड़ों से पहले उन लोगों की आवाज सुनी जाएगी, जिनकी जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ सकता है?
JanjgirChampa जांजगीर–चांपा। ग्राम बिरगहनी स्थित हिंद मल्टी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की कोल वॉशरी विस्तार एवं 25 मेगावाट एएफबीसी पावर प्लांट परियोजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनाधिकार पार्टी के छत्तीसगढ़ संयोजक एवं अध्यक्ष दीपक दुबे ने परियोजना के खिलाफ 53 बिंदुओं का विस्तृत आपत्ति पत्र प्रस्तुत करते हुए स्वतंत्र जांच और सभी प्रकार की स्वीकृतियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
दीपक दुबे ने केंद्रीय और राज्य स्तरीय पर्यावरणीय संस्थाओं, नियामक एजेंसियों तथा जनसुनवाई अधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा है कि यह केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि पिछले लगभग एक दशक से संचालित परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव, जल उपयोग, भूजल दोहन, जनस्वास्थ्य, श्रमिक सुरक्षा, राजस्व अभिलेखों और नियामकीय अनुपालन की व्यापक जांच का विषय है।
जल संसाधनों पर असर की स्वतंत्र जांच की मांग
आपत्ति पत्र में कहा गया है कि परियोजना वर्ष 2016 से संचालित है, लेकिन अब तक क्षेत्र के जल संसाधनों पर इसके वास्तविक प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं कराया गया है। उन्होंने मांग की है कि जल उपलब्धता, भूजल दोहन, सतही जल स्रोतों पर प्रभाव, पुनर्भरण क्षमता और स्थानीय पेयजल स्रोतों पर पड़ने वाले असर का अध्ययन राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ संस्था से कराया जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
उत्पादन और राजस्व रिकॉर्ड की हो जांच
दुबे ने स्थापना से लेकर वर्तमान तक के कोल कंट्रोलर रिटर्न, जीएसटी रिटर्न, रॉयल्टी रिकॉर्ड, रेलवे रिकॉर्ड, ई–वे बिल और उत्पादन संबंधी दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वास्तविक उत्पादन, परिवहन और राजस्व से जुड़े तथ्यों की पारदर्शी जांच आवश्यक है।
कोयला स्टॉक और अपशिष्ट प्रबंधन पर भी सवाल
उन्होंने परियोजना से जुड़े कच्चे कोयले, क्लीन कोल, मिडलिंग, रिजेक्ट और स्लरी के भौतिक सत्यापन के लिए डीजीपीएस सर्वे, ड्रोन सर्वे और जियो–रेफरेंस मैपिंग कराने की मांग की है। साथ ही एंड यूजर वेरिफिकेशन कराने की भी बात कही गई है।
53 गांवों में स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव अध्ययन की मांग
आपत्ति पत्र में परियोजना के 10 किलोमीटर दायरे में आने वाले 53 गांवों के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, सामाजिक प्रभाव अध्ययन, जनस्वास्थ्य मूल्यांकन और आजीविका पर पड़ने वाले असर का ग्रामवार अध्ययन कराने की मांग की गई है।
दीपक दुबे का कहना है कि क्षेत्र में श्वसन संबंधी बीमारियों, बच्चों के स्वास्थ्य, महिलाओं और बुजुर्गों पर संभावित प्रभावों का स्वतंत्र चिकित्सीय संस्थानों से सर्वे कराया जाना चाहिए।
प्रदूषण निगरानी डेटा सार्वजनिक करने की मांग
उन्होंने कहा कि परियोजना से संबंधित ओसीईएमएस, सीईएमएस, वायु गुणवत्ता, भूजल, सतही जल और शोर प्रदूषण निगरानी के सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं तथा उनका थर्ड पार्टी सत्यापन कराया जाए।
फ्लाई ऐश प्रबंधन पर भी उठाए सवाल
प्रस्तावित 25 मेगावाट एएफबीसी पावर प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग 83,700 टन फ्लाई ऐश उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे लेकर दुबे ने फ्लाई ऐश उपयोग योजना, परिवहन व्यवस्था, अंतिम निस्तारण रणनीति और पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने की मांग की है।
CSR और श्रमिक कल्याण की भी जांच हो
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने कंपनी द्वारा स्थापना से अब तक किए गए CSR कार्यों, खर्च और लाभार्थियों की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है। इसके अलावा श्रमिकों के PF, ESI, वेतन, सुरक्षा उपकरण, दुर्घटनाओं और श्रम कानूनों के पालन की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
सभी रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक मंजूरी स्थगित रखने की मांग
दीपक दुबे ने मांग की है कि सभी प्रस्तावित जांच, ऑडिट, तकनीकी अध्ययन और स्वतंत्र सत्यापन पूरे होने तथा उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने तक परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति, जल उपयोग अनुमति, भूजल दोहन स्वीकृति, विस्तार स्वीकृति और प्रस्तावित 25 मेगावाट पावर प्लांट से संबंधित सभी अनुमतियां तत्काल प्रभाव से स्थगित रखी जाएं।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण, जल संसाधन और स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
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