CG Crime News:- केंद्रीय जेल को समझ रखा था खेल! एक…दो…तीन नहीं, चार बार फरार हुआ शातिर बंदी… सात दिन तक जंगल-जंगल पीछा करती रही पुलिस, आखिरकार दबोचा गया

CG Crime News:- चार-चार बार केंद्रीय जेल से भागकर कानून को चुनौती देने वाला दंडित बंदी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा के निर्देश पर नगर पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार धोत्रे के नेतृत्व में पुलिस और साइबर सेल की टीम ने हार नहीं मानी। सात दिनों तक नारायणपुर में डेरा डाला, दिन-रात रेकी की, हर सुराग को खंगाला और आखिरकार 5 साल 3 महीने की सजा काट रहे महेंद्र दीवान को घेराबंदी कर दबोच लिया।बताया जा है कि आरोपी कुछ समय तक सीएएफ (CAF) में ड्राइवर के रूप में भी काम कर चुका था। गिरफ्तारी के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया। इस गिरफ्तारी के साथ ही जेल सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर एक ही बंदी बार-बार कानून को कैसे चुनौती देता रहा।
जगदलपुर। कुछ अपराधी कानून से बच निकलने को अपनी सबसे बड़ी जीत समझ लेते हैं, लेकिन कानून की पकड़ आखिरकार उन तक पहुंच ही जाती है। ऐसा ही हुआ महेंद्र दीवान के साथ। दंतेवाड़ा जेल से भागा, अस्पताल से भागा और फिर केंद्रीय जेल जगदलपुर से भी फरार हो गया। हर बार पुलिस को चकमा देने वाला यह दंडित बंदी आखिरकार बस्तर पुलिस के शिकंजे में आ गया। करीब एक सप्ताह तक नारायणपुर में लगातार रेकी करने के बाद पुलिस ने उसे घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया।
5 साल 3 महीने की सजा काट रहा था आरोपी
गिरफ्तार आरोपी महेंद्र दीवान (25 वर्ष) पिता फूलदास दीवान, निवासी चितालंका कलारपारा, थाना सिटी कोतवाली दंतेवाड़ा है। दंतेवाड़ा थाना के अपराध क्रमांक 104/2024 में धारा 331(4) और 305(5) बीएनएस के तहत दोष सिद्ध होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, दंतेवाड़ा ने उसे 5 वर्ष 3 माह के कारावास की सजा सुनाई थी।
चोरी के कई मामलों में भी दर्ज हैं केस
महेंद्र दीवान सिर्फ एक मामले का आरोपी नहीं है। उसके खिलाफ जिला कांकेर के अपराध क्रमांक 35/2025 (धारा 262 बीएनएस), जिला दंतेवाड़ा के अपराध क्रमांक 35/2025 (धारा 262 बीएनएस) और थाना परपा, बस्तर के अपराध क्रमांक 182/2024 (धारा 262 बीएनएस) समेत कई मामले दर्ज हैं। चोरी के मामलों में वह पहले भी गिरफ्तार हो चुका था।
दंतेवाड़ा जेल से ट्रांसफर होकर आया, फिर जगदलपुर जेल से भाग निकला
महेंद्र दीवान को 4 जनवरी 2026 को जिला जेल दंतेवाड़ा से स्थानांतरित कर केंद्रीय जेल जगदलपुर लाया गया था, जहां वह अपनी सजा काट रहा था। लेकिन 25 मार्च 2026 को वह जेल से फरार हो गया। इसके बाद कोतवाली जगदलपुर में अपराध क्रमांक 130/2026 के तहत धारा 262 बीएनएस में मामला दर्ज किया गया।
पहले भी दो बार पुलिस को दे चुका था धोखा
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक महेंद्र दीवान का फरार होने का यह पहला मामला नहीं था। वह इससे पहले जिला जेल दंतेवाड़ा से भी भाग चुका था। इतना ही नहीं, इलाज के लिए शहीद महेंद्र कर्मा अस्पताल, डिमरापाल ले जाया गया तो वहां से भी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। लगातार फरारी की घटनाओं ने पुलिस के लिए उसे पकड़ना बड़ी चुनौती बना दिया था।
एसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्तर पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने फरार बंदी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग, नगर पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार धोत्रे और उप पुलिस अधीक्षक साइबर सेल अमित देवांगन के मार्गदर्शन में साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक भोला सिंह राजपूत के नेतृत्व में टीम बनाई गई।
एक सप्ताह तक नारायणपुर में तलाश, फिर घेराबंदी कर दबोचा
लगातार तकनीकी इनपुट और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस को पता चला कि आरोपी नारायणपुर जिले में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस टीम ने करीब एक सप्ताह तक नारायणपुर में कैंप कर लगातार रेकी की। जैसे ही उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई, टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
कोर्ट में पेश कर फिर भेजा गया जेल
गिरफ्तारी के बाद महेंद्र दीवान को माननीय न्यायालय जगदलपुर में पेश किया गया। न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया, जहां वह अपनी शेष सजा काटेगा।
इन पुलिसकर्मियों ने निभाई अहम भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक भोला सिंह राजपूत, प्रधान आरक्षक मौसम गुप्ता, आरक्षक माहंगु राम और आरक्षक कृष्ण कुमार नेताम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बस्तर पुलिस ने इसे फरार बंदियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी सफलता माना है।

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