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CG News:- सरगांव में धड़ल्ले से चल रहा ‘कोयला का काला कारोबार’, पुलिसिया संरक्षण के आरोपों से गरमाया मामला, कौन से डिप्टी सीएम के नाम का दुरुपयोग कर रहे अधिकारी?

CG News:— सरगांव में कथित अवैध कोयला कारोबार को लेकर उठ रहे सवाल अब सिर्फ कोयले तक सीमित नहीं हैं। सवाल यह भी है कि यदि स्थानीय लोगों के आरोप लगातार सामने रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हो रही? अगर आरोप बेबुनियाद हैं, तो सच सामने आना चाहिए। और अगर आरोपों में दम है, तो कार्रवाई केवल ट्रकों और डिपो तक नहीं, बल्कि पूरे कथित नेटवर्क और संरक्षण के आरोपों तक भी पहुंचनी चाहिए।

मुंगेली। बिलासपुर जिले में पुलिस की सख्ती के बाद कोल माफियाओं ने मुंगेली जिले के सरगांव को अपना नया ठिकाना बनाया है। इस गिरोह को कथित तौर पर पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। जानकारी के मुताबिक नेशनल हाईवे के किनारे कुछ कोल डिपो में कोयले की मिलावट कर उसे रायपुर, भाटापारा, बलौदाबाजार, तिल्दा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है। इस गोरख धंधे को रोकने में खनिज विभाग नाकाम है और इसे पुलिस के एक अफसर का संरक्षण प्राप्त है। इसकी जानकारी संभाग के उस प्रमुख अधिकारी को है जो निचले स्तर के कर्मचारियों को ठिकाने लगाने की चेतावनी देता रहता है। खैर, असल बात यह है कि बिलासपुर जिले में एक तेज तर्रार आईपीएस अफसर ने कोल माफियाओं के नाक में नकेल डाल दी तो वहाँ से इन माफियाओं को दुकान समेटना पड़ा और अब मुंगेली के सरगांव को नया ठिकाना बनाया गया है।

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कोयले की कालिख से सनी खाखी…
सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन कोयले की कालिख खाखी तक पहुँच गई है। करोड़ों रुपए के इस गोरखधंधे में एक थाना का टीआई भी शामिल हो गया और अब कोयले में मिलावट करके अपनी तोंद बढ़ाने का काम कर रहा है। संरक्षण देने वाले इस थानेदार को भी ऊपर से पूरा संरक्षण प्राप्त है। तभी तो कहा जा रहा है कि सैया भए कोतवाल तो डर काहे का और जब किसी का डर ही नहीं है तो मिलावट का खेल जारी है।

कौन है डिप्टी सीएम जिनके नाम का हो रहा दुरुपयोग?

कोल माफियाओं के इस सिंडिकेट में डिप्टी सीएम के ठिकाने बैठा एक अधिकारी भी शामिल है। यह अपने साहब के नाम का इस्तेमाल कर कोल माफियाओं को आश्वासन दे रहा है कि उसके होते कुछ नहीं होगा यानी सब सेट है। भले ही इस काले कारोबार का पता डिप्टी सीएम को नहीं है मगर उनके नाम पर यह कारोबार चलाया जा रहा है। यदि डिप्टी सीएम साहब को यह जानकारी मिल जाए तो इस सिंडिकेट के माफिया और उसको संरक्षण देने वाली टीम का बस्तर के नक्सलियों की तरह सफाया हो सकता है।

असल में सरगांव राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा क्षेत्र है, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही आसान रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी भौगोलिक सुविधा का लाभ उठाकर कथित अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है।

पॉवर प्लांटों में वाहन पकड़े जाते हैं… लेकिन नेटवर्क तक क्यों नहीं पहुंचती जांच?

जानकारी के अनुसार समय-समय पर विभिन्न औद्योगिक प्लांटों में संदिग्ध कोयला लेकर पहुंचे वाहनों के पकड़े जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश मामलों में केवल जुर्माना वसूलकर कार्रवाई समाप्त कर दी जाती है। यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि कार्रवाई केवल ट्रकों तक सीमित क्यों रहती है? आखिर कथित सिंडिकेट चलाने वालों तक जांच क्यों नहीं पहुंचती?

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स्कूल के सामने कोल डिपोहर दिन खतरे के बीच गुजरते बच्चे

सरगांव-पथरिया मार्ग पर एक विद्यालय के समीप संचालित कोल डिपो भी स्थानीय लोगों की चिंता का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यहां प्रतिदिन कोयले से लदे भारी वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। इन्हीं वाहनों के बीच से स्कूली बच्चे और आम राहगीर गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार हादसे जैसी स्थिति बन चुकी है, लेकिन न तो भारी वाहनों के संचालन पर नियंत्रण किया गया और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए।

ट्रक चालक की हत्याफिर भी नहीं थमा कथित कारोबार

सरगांव क्षेत्र पहले भी कोयला कारोबार को लेकर विवादों में रह चुका है। कोयले की चोरी से जुड़े विवाद में एक ट्रक चालक की हत्या हो चुकी है। इस मामले में पुलिस ने एक कोल डिपो के कर्मचारी को गिरफ्तार भी किया था। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि कथित अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है। इससे क्षेत्र में कई तरह की आशंकाएं और सवाल लगातार उठ रहे हैं।

खनिज विभाग बोलाऔचक निरीक्षण होगा

जब इस पूरे मामले में जिला खनिज अधिकारी योगेश साहू से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि सरगांव क्षेत्र में जल्द ही औचक निरीक्षण किया जाएगा। यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधि पाई जाती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल

बिलासपुर में जब अवैध कोयला कारोबार पर कार्रवाई तेज हुई, तो उम्मीद थी कि यह खेल थम जाएगा। लेकिन सरगांव को लेकर उठ रही चर्चाओं ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहले से सक्रिय बताया जाने वाला कथित सिंडिकेट अब सरगांव में नजर आ रहा है। लोगों का आरोप है कि जिस पुलिस अधिकारी की बिलासपुर में पदस्थापना के दौरान भी कथित कोयला कारोबार को लेकर सवाल उठते रहे, उसी अधिकारी के सरगांव क्षेत्र से जुड़ने के बाद यहां भी गतिविधियां बढ़ने की बातें कही जा रही हैं। इन आरोपों की किसी सक्षम एजेंसी ने अब तक पुष्टि नहीं की है और संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

सवाल कई हैं। अगर बिलासपुर में कार्रवाई के बाद सरगांव में कथित गतिविधियां बढ़ीं, तो क्या यह सिर्फ संयोग है? यदि स्थानीय लोगों के आरोप बेबुनियाद हैं, तो उनकी जांच क्यों नहीं कराई जाती ताकि सच सामने सके? और अगर आरोपों में दम है, तो क्या जांच केवल ट्रकों और डिपो तक सीमित रहेगी या संरक्षण के आरोपों की भी निष्पक्ष पड़ताल होगी? यदि स्थानीय लोगों के आरोप सही हैं तो सवाल सिर्फ अवैध कोयले का नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या कार्रवाई छोटे खिलाड़ियों तक ही सीमित रहेगी, या फिर कथित नेटवर्क और उसके संरक्षण की भी निष्पक्ष जांच होगी? और यदि आरोप गलत हैं, तो एक व्यापक जांच इन आशंकाओं को भी हमेशा के लिए खत्म कर सकती है।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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