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CG News:- रोजगार वरीयता सूची में महाघोटाले का खेल? भू-विस्थापित ने CM हेल्पलाइन में खोला मोर्चा, कलेक्टर और NTPC पर गंभीर आरोप, SDM को जांच से दूर रखने की लगाई गुहार

CG News:-सीपत एनटीपीसी परियोजना की वर्ष 2008 की रोजगार वरीयता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भू-विस्थापित भगत सिंह राठौर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में वर्तमान कलेक्टर के तत्कालीन एसडीएम कार्यकाल में बनी सूची में कथित अनियमितताओं, पात्र भू-विस्थापितों को रोजगार से वंचित करने और अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर के सीपत स्थित एनटीपीसी परियोजना की रोजगार वरीयता सूची को लेकर वर्षों से उठ रहे सवाल अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच गए हैं। परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापित भगत सिंह राठौर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कर वर्ष 2008 में तैयार की गई रोजगार वरीयता सूची की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत में जिला प्रशासन, एनटीपीसी प्रबंधन और तत्कालीन एसडीएम तथा वर्तमान बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के कार्यकाल में तैयार की गई सूची पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

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वर्ष 2008 की रोजगार वरीयता सूची पर उठे सवाल

शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2008 में एनटीपीसी परियोजना प्रभावितों को रोजगार देने के लिए तैयार की गई वरीयता सूची में नियमों का पालन नहीं किया गया। भगत सिंह राठौर का आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम एवं वर्तमान कलेक्टर संजय अग्रवाल के कार्यकाल में तैयार सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं, जिसके कारण कई वास्तविक पात्र भू-विस्थापित आज तक रोजगार से वंचित हैं।

एक एकड़ से अधिक भूमि वालों को नहीं मिली नौकरी

शिकायतकर्ता का कहना है कि जिन भू-विस्थापितों की एक एकड़ या उससे अधिक भूमि अधिग्रहित हुई थी, उन्हें नियमानुसार तीन वर्ष के भीतर रोजगार दिया जाना था। लेकिन नियम होने के बावजूद आज तक अनेक पात्र प्रभावित परिवारों को नौकरी नहीं मिल सकी।

कम जमीन वालों को ज्यादा दिखाकर नौकरी देने का आरोप

भगत सिंह राठौर ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में एक एकड़ से कम भूमि अधिग्रहित होने के बावजूद रिकॉर्ड में अधिक भूमि अधिग्रहित दर्शाकर लोगों को रोजगार वरीयता सूची में शामिल किया गया। बाद में उन्हीं लोगों को नौकरी भी मिल गई, जबकि वास्तविक पात्र भू-विस्थापित रोजगार की प्रतीक्षा करते रह गए।

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SDM शिवराम कंवर को जांच से दूर रखने की मांग

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत में भगत सिंह राठौर ने यह भी अनुरोध किया है कि इस मामले की जांच मस्तूरी एसडीएम शिवराम कंवर को नहीं सौंपी जाए। उनका आरोप है कि संबंधित अधिकारी उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुनते, रिकॉर्ड का परीक्षण नहीं करते और कार्रवाई करने में असमर्थता जताते हैं। इसलिए उन्होंने किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराने की मांग की है।

मंत्रालय के निर्देश भी नहीं हुए लागू

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन छत्तीसगढ़ की ओर से दिए गए आवेदन के बाद ऊर्जा विभाग, मंत्रालय ने रोजगार वरीयता सूची की जांच कराने और त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी न जांच पूरी हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई।

छह से सात वर्षों से लगा रहे न्याय की गुहार

भगत सिंह राठौर का कहना है कि वे पिछले छह से सात वर्षों से लगातार जिला प्रशासन, विभिन्न विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों के समक्ष आवेदन देकर न्याय की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक राहत नहीं मिली। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और पात्र भू-विस्थापितों को शीघ्र रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज हुई शिकायत, अब सबकी नजर कार्रवाई पर

इन्हीं मांगों को लेकर भगत सिंह राठौर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में जिला प्रशासन और कलेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज इस शिकायत के बाद वर्षों से विवादों में रही रोजगार वरीयता सूची की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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RAVI TAMBOLI

एक सक्रिय और निष्पक्ष समाचार रिपोर्टर हैं, जो सामाजिक, राजनीतिक और स्थानीय मुद्दों पर सटीक व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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