CG Education News:- VIDEO: नक्सलवाद के साए से निकलकर अब सपनों की उड़ान… ‘ज्ञानगुड़ी’ में भविष्य गढ़ रहे बस्तर के युवा, कलेक्टर-एसपी बने शिक्षक

CG Education News:- कभी नक्सल दहशत के कारण गांव से बाहर निकलने से डरने वाले बस्तर के युवा आज ज्ञानगुड़ी केंद्र में SSC, व्यापम, बैंकिंग समेत बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। खास बात यह है कि बस्तर कलेक्टर और एसपी खुद क्लास लेकर छात्रों का मार्गदर्शन कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए बस्तर छोड़कर बाहर न जाना पड़े।
जगदलपुर। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था, “सपने वो नहीं जो हम सोते वक्त देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।” बस्तर के अंदरूनी इलाकों के युवाओं ने इस विचार को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया है। जो बच्चे कभी नक्सलवाद के डर से गांव से बाहर निकलने से भी कतराते थे, वे आज प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर अपने भविष्य को नई दिशा देने में जुटे हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है जगदलपुर का ज्ञानगुड़ी केंद्र।
नक्सल दहशत से उम्मीद की नई शुरुआत

नक्सलवाद का दंश झेल चुके बस्तर में एक समय ऐसा था, जब अंदरूनी गांवों के छात्र-छात्राओं के लिए शहर जाकर पढ़ाई करना या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना किसी सपने जैसा था। हालात ऐसे थे कि कई युवा अपने गांव की सीमाओं से बाहर भी नहीं निकल पाते थे। लेकिन बदलते बस्तर के साथ अब तस्वीर भी बदल रही है। अब यही युवा पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने करियर को संवारने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
ज्ञानगुड़ी में मिल रही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
जगदलपुर में संचालित ज्ञानगुड़ी केंद्र में 12वीं पास करने के बाद छात्र–छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। यहां बस्तर के युवा SSC, व्यापम, बैंकिंग समेत कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि अपने सपनों को साकार करना भी है।
कलेक्टर और एसपी बने छात्रों के शिक्षक
ज्ञानगुड़ी केंद्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा और बस्तर एसपी स्वयं छात्रों के शिक्षक बनकर उनका मार्गदर्शन करते हैं। वे समय–समय पर क्लास लेकर विद्यार्थियों के सवालों के जवाब देते हैं, परीक्षा की रणनीति समझाते हैं और सफलता के लिए जरूरी टिप्स भी साझा करते हैं। इससे छात्रों का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है।
दूर–दराज के जिलों से भी पहुंच रहे छात्र
ज्ञानगुड़ी केंद्र में केवल जगदलपुर ही नहीं, बल्कि बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, दरभा और कांकेर के चारामा जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से भी छात्र–छात्राएं पहुंच रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहां विशेषज्ञ शिक्षकों की विशेष टीम बनाई गई है, जो विद्यार्थियों को व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन दे रही है।
अब बस्तर में ही मिलेगा बेहतर मार्गदर्शन
बदलते बस्तर की यह नई तस्वीर इसलिए भी खास है क्योंकि अब युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे शहरों या राज्यों का रुख नहीं करना पड़ रहा। ज्ञानगुड़ी केंद्र में ही उन्हें बेहतर शिक्षकों, अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कलेक्टर आकाश छिकारा का कहना है कि बस्तर के युवाओं को अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बस्तर के भविष्य की नई पहचान बन रहा ज्ञानगुड़ी

एक समय था जब नक्सलवाद ने बस्तर के युवाओं के सपनों को डर और असुरक्षा के बीच कैद कर दिया था। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। बंदूक की आवाज की जगह अब किताबों की आवाज सुनाई दे रही है। ज्ञानगुड़ी सिर्फ एक कोचिंग सेंटर नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य को संवारने वाला ऐसा केंद्र बन चुका है, जहां युवा पूरे समर्पण और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करने की तैयारी कर रहे हैं। बदलते बस्तर की यह तस्वीर बताती है कि जब अवसर, मार्गदर्शन और भरोसा मिलता है, तो सबसे कठिन हालात में भी नई उम्मीदें जन्म लेती हैं।

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