CG News:- एक्शन में SSP रजनेश सिंह, चालान अटकाने और ई-साक्ष्य में लापरवाही पर डेढ़ दर्जन थाना प्रभारियों की लगी क्लास; 60-90 दिन की डेडलाइन चूकी तो चेतावनी, अच्छा काम करने वालों को CR में सम्मान और 10 पुलिसकर्मियों को ₹500-₹500 कैश रिवार्ड

CG News:- नए आपराधिक कानून के बाद पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ आरोपी पकड़ने तक नहीं रह गई है। बिलासपुर में एसएसपी रजनेश सिंह ने 60/90 दिन में चालान पेश करने से लेकर ई-साक्ष्य, SID, E-FSL, MedLEaPR और CCTNS में रिकॉर्ड अपडेट करने तक की व्यवस्था की समीक्षा की, जहां लापरवाही मिली वहां थाना प्रभारियों को चेतावनी दी गई और बेहतर काम करने वालों की सेवा पुस्तिका में प्रशंसा दर्ज की गई। ई-साक्ष्य के काम में अच्छा प्रदर्शन करने वाले 10 पुलिसकर्मियों को ₹500-₹500 का नकद पुरस्कार भी मिला। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि कितने आरोपी पकड़े गए, सवाल यह भी है कि जांच कितनी मजबूत हुई और अदालत तक पहुंचने वाला मामला कितना पुख्ता है।
बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने इन सवालों का जवाब पुलिस अफसरों से लेना शुरू कर दिया है। थानों के कामकाज की समीक्षा के बाद जहां लापरवाही मिली, वहां चेतावनी की सजा दी गई। वहीं अच्छा काम करने वालों की सेवा पुस्तिका यानी CR में प्रशंसा दर्ज कराई गई। ई-साक्ष्य के काम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 10 पुलिसकर्मियों को ₹500-₹500 का कैश रिवार्ड भी दिया गया।
60-90 दिन की डेडलाइन… चूके तो चेतावनी
नए आपराधिक कानून के तहत निर्धारित समय-सीमा में अभियोग पत्र न्यायालय में पेश करना अहम है। लेकिन बिलासपुर में समीक्षा के दौरान कई थाना प्रभारियों के काम में देरी सामने आई।
बिल्हा के तोपसिंह नवरंग, सीपत के राजेश मिश्रा, मस्तूरी के कृष्णचंद्र सिदार, तखतपुर के अवनीश पासवान, सिटी कोतवाली के देवेश सिंह राठौर, कोनी के विवेक पाण्डेय, सिविल लाइन के किशोर केंवट, सकरी के उमेश साहू, चकरभाठा के भावेश शेण्डे, तारबाहर के रविन्द्र अनंत, पचपेड़ी की कमला पुसाम, हिर्री के दामोदर मिश्रा, रतनपुर के निलेश पाण्डेय, महिला थाना की मानकुंवर सिदार, अजाक के उत्तम साहू, तोरवा के रजनीश सिंह, सिरगिट्टी के वाय.पी. सिंह और रेंज साइबर थाना के प्रसाद सिन्हा को चेतावनी दी गई।
मतलब साफ है—60/90 दिन की घड़ी अब सिर्फ कानून की किताब में नहीं चलेगी, थाना स्तर पर भी इसकी टिक–टिक सुनी जाएगी।




ई–साक्ष्य में लापरवाही… यहां भी नहीं मिली राहत
नए कानून ने पुलिस की जांच का तरीका बदल दिया है। अब डिजिटल साक्ष्य भी केस की रीढ़ है। ई-साक्ष्य तैयार करना, SID जनरेट करना और उसे संबंधित अपराध से लिंक करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।लेकिन इसी प्रक्रिया में लापरवाही सामने आने पर यशवंत प्रताप सिंह, रजनीश सिंह, निलेश पाण्डेय, कृष्णचंद्र सिदार, उमेश साहू, किशोर केंवट, प्रदीप आर्य और रविन्द्र अनंत को चेतावनी दी गई।सवाल बड़ा है—जब अदालत में डिजिटल साक्ष्य केस की दिशा बदल सकता है, तो उसकी प्रक्रिया में लापरवाही आखिर क्यों?
CCTNS में FIR-चार्जशीट… यहां भी ‘रेड फ्लैग’
डिजिटल साइन FIR और चार्जशीट को CCTNS सॉफ्टवेयर में अपलोड करने में लापरवाही भी सामने आई।इस पर उत्तम साहू, भावेश शेण्डे, देवेश सिंह राठौर, किशोर केंवट, विवेक पाण्डेय, निलेश पाण्डेय, रविन्द्र अनंत, रजनीश सिंह, ओमप्रकाश कुर्रे और बी.एन. बनाफर को चेतावनी दी गई।
यानी कागज पर केस दर्ज करने से लेकर सिस्टम पर रिकॉर्ड चढ़ाने तक—हर कदम पर अब जवाबदेही तय होगी।




दूसरी तस्वीर भी देखिए… अच्छा काम किया तो CR में सम्मान
कार्रवाई सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं रही। बेहतर काम करने वालों को सम्मान भी मिला।60/90 दिन में अभियोग पत्र पेश करने में उत्कृष्ट कार्य के लिए मानकुंवर सिदार, प्रदीप आर्य, दामोदर मिश्रा, वाय.पी. सिंह, निलेश पाण्डेय और रजनीश सिंह की सेवा पुस्तिका में प्रशंसा दर्ज की गई।


चार्जशीट का ड्राफ्ट तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत करने में बेहतर काम करने वालों में किशोर केंवट, निलेश पाण्डेय, राजेश मिश्रा, कृष्ण चंद्र सिदार, रजनीश सिंह, तोप सिंह नवरंग, विवेक पाण्डेय, वाय.पी. सिंह और अवनीश पासवान शामिल हैं।
MedLEaPR से लेकर E-FSL तक… डिजिटल काम पर भी नजर
MLC और PMR फार्म MedLEaPR पोर्टल के माध्यम से भेजने में बेहतर काम करने वाले यशवंत प्रताप सिंह, उमेश साहू, प्रदीप आर्य, निलेश पाण्डेय, कृष्णचंद्र सिदार, तोपसिंह नवरंग, किशोर केंवट, विवेक पाण्डेय, भावेश शेण्डे और अवनीश पासवान की भी सेवा पुस्तिका में प्रशंसा दर्ज की गई।
वहीं 01 जुलाई 2024 से 04 अगस्त 2026 तक E-FSL डाटा रासायनिक परीक्षण के लिए भेजने में उत्कृष्ट काम करने वाले प्रदीप आर्य, वाय.पी. सिंह, किशोर केंवट, उमेश साहू, निलेश पाण्डेय, राजेश मिश्रा, रजनीश सिंह, विवेक पाण्डेय और भावेश शेण्डे की भी प्रशंसा की गई।
10 पुलिसकर्मी… जेब में ₹500 और रिकॉर्ड में सम्मान
ई-साक्ष्य तैयार करने, SID जनरेट करने और उसे अपराध से लिंक करने में उत्कृष्ट काम करने वाले 10 पुलिसकर्मियों को ₹500-₹500 का नकद पुरस्कार दिया गया।इनमें उनि. गणेशराम महिलांगे (सकरी), उनि. मीना ठाकुर (कोटा), उनि. संतोषी अग्रवाल (सिरगिट्टी), सउनि. धर्मेंद्र यादव (सीपत), सउनि. भरत सिंह मरकाम (सीपत), सउनि. कमलफूल साहू (सीपत), प्र.आर. 1503 भुनेश्वर मरावी (सरकण्डा), प्र.आर. सत्यप्रकाश यादव (कोटा), प्र.आर. जयपाल बंजारे (तखतपुर) और प्र.आर. 119 संगीता नेताम (सरकण्डा) शामिल हैं।
लापरवाही पर चेतावनी… दोहराई तो अनुशासनात्मक कार्रवाई
ई-साक्ष्य तैयार कर SID जनरेट करने और अपराध से लिंक करने में लापरवाही बरतने वाले यशवंत प्रताप सिंह, रजनीश सिंह, निलेश पाण्डेय, कृष्णचंद्र सिदार, उमेश साहू, किशोर केंवट, प्रदीप आर्य और रविन्द्र अनंत को चेतावनी दी गई है।
साथ ही साफ निर्देश है कि भविष्य में नवीन कानून के ई–साक्ष्य संबंधी प्रावधानों की अनदेखी दोहराई गई तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
चार्जशीट में देरी करने वालों की सेवा पुस्तिका में भी चेतावनी दर्ज की गई है। इनमें तोप सिंह नवरंग, राजेश मिश्रा, कृष्णचंद्र सिदार, अवनीश पासवान, देवेश सिंह राठौर, विवेक पाण्डेय, किशोर केंवट, उमेश साहू, भावेश शेण्डे, रविन्द्र अनंत, कमला पुसाम, दामोदर मिश्रा, निलेश पाण्डेय, मानकुंवर सिदार, उत्तम साहू, रजनीश सिंह, वाय.पी. सिंह और प्रसाद सिन्हा शामिल हैं।
असली सवाल गिरफ्तारी का नहीं… केस के अंजाम का है
पुलिस ने आरोपी पकड़ लिया—यह खबर हो सकती है। लेकिन आरोप साबित कैसे होगा? अदालत में साक्ष्य कितना मजबूत होगा? चार्जशीट समय पर पहुंची या नहीं? डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित और लिंक है या नहीं?
यही वह जगह है जहां पुलिस की असली परीक्षा होती है।
एसएसपी रजनेश सिंह की कार्रवाई का संदेश भी यही है कि पुलिसिंग का मूल्यांकन अब सिर्फ गिरफ्तारी और अपराध के आंकड़ों से नहीं होगा। विवेचना की गुणवत्ता, तकनीकी प्रक्रिया और न्यायालय में समय पर मजबूत अभियोग पत्र पेश करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
एक तरफ ₹500 का इनाम… दूसरी तरफ CR में चेतावनी। बिलासपुर पुलिस में अब संदेश साफ है—काम अच्छा तो सम्मान, लापरवाही हुई तो हिसाब।

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