CG Crime News:- कोटा के जंगलों में सागौन तस्करों पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, लकड़ी से भरी पिकअप और बाइक जब्त, चार पर केस

CG Crime News:- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में वन विभाग ने अवैध सागौन तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लकड़ी से लदी एक महिंद्रा पिकअप और रेकी में इस्तेमाल की जा रही बाइक जब्त की है। कोटा परियोजना मंडल के भैंसाझार परिक्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के बाद चार आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत वन अपराध दर्ज किया गया है।
बिलासपुर। जिले के कोटा परियोजना मंडल अंतर्गत भैंसाझार परिक्षेत्र में वन विभाग की टीम ने अवैध सागौन तस्करी का भंडाफोड़ किया है। रात्रिकालीन गश्त के दौरान लकड़ी से भरी एक महिंद्रा पिकअप और उसके साथ चल रही एक बाइक को रोककर जांच की गई। तलाशी में पिकअप से सागौन के 11 लट्ठे बरामद हुए, जिनकी अनुमानित कीमत 50 से 60 हजार रुपये बताई जा रही है।
रात की गश्त में पकड़ी गई तस्करी
जानकारी के मुताबिक, कलमीटार बीट के जोगीपुर-रतनपुर मार्ग पर वन अमला नियमित रात्रि गश्त पर था। इसी दौरान संदिग्ध महिंद्रा पिकअप (CG-10 CA-5582) को रोककर उसकी जांच की गई। वाहन के भीतर सागौन की लकड़ियां छिपाकर रखी गई थीं, जिन्हें बिना किसी वैध अनुमति के परिवहन किया जा रहा था।
कोटा के जंगलों में तस्करों का नेटवर्क सक्रिय
कोटा क्षेत्र के जंगलों में सागौन सहित अन्य इमारती लकड़ियों की अवैध कटाई लंबे समय से जारी है। तस्कर पहले जंगलों में पेड़ों को काटकर लकड़ी छिपा देते हैं और फिर मौका मिलने पर उसे आसपास के गांवों में पहुंचाकर शहरों या अन्य इलाकों में भेज देते हैं। स्थानीय स्तर पर अवैध कटाई में कुछ वनकर्मियों की मिलीभगत के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। यही वजह है कि कोटा क्षेत्र में सागौन तस्करी का यह कोई पहला मामला नहीं माना जा रहा है। इससे पहले भी कई बार ऐसे नेटवर्क का खुलासा हो चुका है।
दस्तावेज नहीं मिले, बाइक भी जब्त
कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने वाहन चालक और उसके साथ मौजूद लोगों से लकड़ी परिवहन के वैध दस्तावेज, बिल और रसीद प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन वे कोई भी दस्तावेज नहीं दिखा सके। जांच में यह भी सामने आया कि तस्करी के दौरान रेकी और सहयोग के लिए होंडा लीवो बाइक (CG-28 C-3192) का इस्तेमाल किया जा रहा था। वन अमले ने बाइक को भी जब्त कर लिया।
इसके बाद जब्त सागौन, महिंद्रा पिकअप और बाइक को अभिरक्षा में लेते हुए नीलकुमार घृतलहरे, ललित साहू, लालसिंह और दुर्गेश पाली के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत वन अपराध दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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