CG Police News:- क्या अपराध सिर्फ गिरफ्तारी से रुकते हैं? या अपराधी को अपराध करने से पहले रोकना भी पुलिस की जिम्मेदारी है? बिलासपुर रेंज के IG राम गोपाल गर्ग अब इसी सवाल का जवाब तलाश रहे हैं,

CG Police News:-बिलासपुर। क्या पुलिस का काम सिर्फ अपराध होने के बाद आरोपी पकड़ना है? या फिर अपराध होने से पहले उसे रोकना भी पुलिस की जिम्मेदारी है? बिलासपुर रेंज में अब इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश शुरू हुई है। पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ को केंद्र में रखकर बड़ा रोडमैप तैयार किया है। अब हर सक्रिय बदमाश पर एक पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी तय होगी, निगरानी बदमाशों के लिए नई SOP लागू होगी और त्योहारों से पहले थानों में गुंडा परेड भी कराई जाएगी।
बिलासपुर। पुलिस अक्सर तब दिखाई देती है जब अपराध हो चुका होता है। लेकिन अगर पुलिस अपराध होने से पहले ही उसकी आहट पकड़ ले, तो तस्वीर बदल सकती है। बिलासपुर रेंज में अब इसी सोच पर काम शुरू हो गया है। पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने साफ कहा है कि पुलिस की असली सफलता अपराध होने के बाद गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अपराध की पुनरावृत्ति रोकने में है। इसी उद्देश्य से बिलासपुर रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ को पुलिस व्यवस्था का केंद्र बनाने की रणनीति तय की गई।
कार्यशाला में रेंज के सभी पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी और थाना प्रभारी शामिल हुए। सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने ‘गुंडा एवं निगरानी बदमाश’ विषय पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि अपराध नियंत्रण केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और मजबूत बेसिक पुलिसिंग से संभव है।
अब हर बदमाश की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी की
कार्यशाला का सबसे अहम निर्णय रहा ‘एक गुंडा–एक जवान’ नीति। इसके तहत प्रत्येक निगरानीशुदा बदमाश पर एक विशेष पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी तय होगी। उसका काम केवल रिकॉर्ड संभालना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित बदमाश दोबारा अपराध की राह पर न लौटे।
आईजी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जमानत पर छूटने के बाद यदि कोई आरोपी फिर अपराध करता है तो BNSS की धारा-480 के तहत उसकी जमानत निरस्त कराने की कार्रवाई तत्काल की जाए। जरूरत पड़ने पर धारा-110 BNSS, 20 से 50 हजार रुपये का बाउंड ओवर, जिला बदर और PIT NDPS जैसे कानूनी प्रावधानों का भी प्रभावी उपयोग किया जाए।
अपराधियों की नई श्रेणी, नई निगरानी
पुलिस रेगुलेशन के पैरा 855 से 860 के तहत आदतन चोर और लुटेरों को A-Class निगरानी बदमाश तथा मारपीट, रंगदारी और भू-माफिया जैसे अपराधियों को B-Class गुंडा श्रेणी में रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी का फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खातों सहित पूरा बायोडाटा अपडेट रहेगा और गंभीर अपराधियों की गैंग हिस्ट्री शीट तैयार की जाएगी।
सरप्राइज चेकिंग होगी, लेकिन कानून की सीमा में
आईजी ने कहा कि बदमाशों की चेकिंग का समय तय नहीं होना चाहिए। पुलिस टीम दो-तीन जवानों के समूह में जाएगी, सुरक्षा SOP का पालन करेगी और बदमाशों की जीवनशैली तथा आय के स्रोत का भी मिलान करेगी।
लेकिन इसी के साथ एक महत्वपूर्ण बात भी कही गई। पुलिस की सख्ती कानून से बड़ी नहीं हो सकती।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट के पुट्टस्वामी निर्णय और अमानतुल्लाह खान बनाम दिल्ली पुलिस (2024) के निर्देशों का पालन करते हुए किसी भी विमुक्त जनजाति, पिछड़े वर्ग या नाबालिग के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं होगी। निजता और मानवाधिकारों का सम्मान हर हाल में किया जाएगा।
थानों के पुराने रजिस्टर फिर होंगे सक्रिय
रोजनामचा में रवानगी और वापसी की क्रॉस एंट्री, रजिस्टर-7, परवाना फाइल, A-to-Z अल्फाबेटिकल रजिस्टर तथा बीट अधिकारियों की A, B और C नोटबुक को दोबारा प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि रिकॉर्ड और जमीनी कार्रवाई में कोई अंतर न रहे।
गांव से लेकर दूसरे राज्यों तक निगरानी
ग्राम अपराध नोटबुक (VCNB) में गांव के प्रतिष्ठित नागरिकों, कोटवारों और पेंशनरों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। कोटवारों की रोस्टर हाजिरी और मुसाफिर रजिस्टर अनिवार्य होंगे। वहीं अंतरराज्यीय और अंतरजिला अपराधियों की जानकारी BC Roll, SS Roll, Cri-MAC ऐप, Natgrid और CDR के जरिए साझा और ट्रैक की जाएगी।
जो सुधर गए, उन्हें राहत भी मिलेगी
कार्यशाला में यह भी तय हुआ कि जो लोग वर्षों पहले अपराध छोड़ चुके हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं, उन्हें निगरानी सूची से हटाया जाएगा। ताकि पुलिस का समय और संसाधन केवल सक्रिय अपराधियों पर केंद्रित रहे।
त्योहारों से पहले होगी गुंडा परेड
राष्ट्रीय पर्व और त्योहारों से पहले सभी थानों में निगरानी बदमाशों और गुंडों की परेड कराई जाएगी। उद्देश्य यही रहेगा कि त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था पर किसी तरह का खतरा पैदा न हो।
200 पुलिस अधिकारी हुए शामिल
बिलासपुर रेंज के सभी जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इस ऑनलाइन कार्यशाला में शामिल हुए। अंत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने सक्ती एसपी प्रफुल्ल ठाकुर का आभार व्यक्त करते हुए सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे स्वयं इन आदेशों की निगरानी करें और हर थाना स्तर पर इनका शत–प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराएं।

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