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CG News:- अंगूठा लगवाकर भी नहीं मिल रहा चावल… और सिस्टम सोया रहा! 17 की शक्कर 20 में बिकी, गांव बोला—ये राशन है या लूट का लाइसेंस?”

CG News:- गांव में राशन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अंगूठा लगवाने के बाद भी चावल नहीं मिल रहा, जबकि शक्कर तय दर से अधिक कीमत पर बेची जा रही है। समय पर राशन मिलने से नाराज लोग अब सिस्टम से जवाब मांग रहे हैं और आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।

रिपोर्टर: बिपत सारथी

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GPMNews:- पेंड्रा (गौरेलापेंड्रामरवाही): ये कहानी सिर्फ एक राशन दुकान की नहीं हैये उस सिस्टम की है, जहां गरीब अपना हक लेने जाता है और जवाब में उसे या तो खाली हाथ लौटना पड़ता है या फिर जेब से और पैसा देना पड़ता है।

ग्राम पंचायत लटकोनी के आश्रित ग्राम कोदवाही में दुर्गा समूह द्वारा संचालित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकान पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां राशनवितरणकम औरसमझौताज्यादा हो रहा है।

अंगूठा तो लग गयालेकिन चावल कहां गया?

ग्रामीणों का आरोप है कि बायोमेट्रिक मशीन में अंगूठा लगवाने के बाद भी कई कार्डधारियों को चावल नहीं दिया जाता। सवाल सीधा है
अगर अंगूठा लग गया, रिकॉर्ड बन गया, तो अनाज गया कहां?

लोग कईकई बार लाइन में लगते हैं, और हर बार खाली हाथ लौटते हैं।

17 की जगह 20 रुपयेये 3 रुपये आखिर किसकी कमाई?

ग्रामीणों का आरोप सिर्फ चावल तक सीमित नहीं है। शक्कर, जो 17 रुपये प्रति किलो तय है, उसे 20 रुपये में बेचे जाने की बात सामने आई है।

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यानी हर किलो पर 3 रुपये ज्यादा।
छोटा आंकड़ा लग सकता है, लेकिन गरीब की थाली में यही 3 रुपये बड़ा फर्क पैदा करते हैं।

राशन कब मिलेगा? महीने के आखिरी दिन या जब मन करे?

ग्रामीणों का कहना है कि राशन समय पर नहीं मिलता। ज्यादातर महीने के अंतिम दिनों में ही दुकान खुलती है।

अब सवाल ये है
क्या यह व्यवस्था है या फिर मजबूरी को सिस्टम की लापरवाही में बदल दिया गया है?

सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे, दुकान पर लटका मिला ताला

जब लोगों का गुस्सा फूटा और सैकड़ों ग्रामीण राशन दुकान पहुंचे, तो वहां ताला लटका मिला।

इसके बाद लोग सरपंच के पास पहुंचे, अपनी पीड़ा रखी और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

कलेक्टर तक शिकायत, अब कार्रवाई का इंतजार

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर दुकान संचालक को हटाने और नए विक्रेता की नियुक्ति की मांग की है।

लेकिन बड़ा सवाल यही है
शिकायतें कितनी फाइलों में बदल जाएंगी और कार्रवाई कब जमीन पर दिखेगी?

आंदोलन की चेतावनीअब गांव चुप नहीं रहेगा

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे चक्का जाम और बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

अब सवाल सिस्टम से है

ये सिर्फ एक दुकान की कहानी नहीं हैये उस भरोसे की कहानी है, जो गरीब हर महीने राशन के नाम पर सिस्टम से करता है।

और सवाल यही है
क्या इस बार जवाब मिलेगा या फिर एक और शिकायत फाइलों में दफन हो जाएगी?

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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