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Bilaspur News:– डिब्बाबंद गौमांस बिक्री पर सहआरोपी कारोबारी के खिलाफ कार्यवाही पर हाईकोर्ट की रोक, राज्य सरकार को दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश

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Bilaspur News:– डिब्बाबंद गौमांस की बिक्री से जुड़े चर्चित मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहआरोपी कारोबारी के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों से दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र सहित जवाब पेश करने को कहा है।

बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मंगलवार को डिब्बाबंद गौमांस बिक्री प्रकरण की सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने व्यापारी रविनपाल अग्रवाल की याचिका पर विचार करते हुए फिलहाल उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण की कार्यवाही पर रोक लगा दी। अदालत ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है।

मामला कैसे शुरू हुआ

यह मामला 30 जनवरी 2025 को सामने आया था, जब रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र के ईश्वरी प्लाजा स्थित “नॉर्थ ईस्ट फूड” दुकान और “नॉर्थ ईस्ट किचन” रेस्टोरेंट में पुलिस ने छापा मारा।
गो-सेवकों से मिली सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने दावा किया कि वहां से डिब्बाबंद बीफ बरामद हुआ।

छापेमारी के बाद पुलिस ने दुकान संचालिका रूबी वनलारेग और व्यापारी रविनपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषि मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 5 और 10 सहित अन्य धाराओं में अपराध दर्ज किया गया।

कारोबारी की दलील

गिरफ्तार सहआरोपी रविनपाल अग्रवाल ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका तर्क है कि वे जिम और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स के व्यापारी हैं और जिस दुकान से बीफ बरामद हुआ, उसका उनसे कोई संबंध नहीं है।
राज्य सरकार का दावा है कि दुकान उन्हीं की है, लेकिन अग्रवाल ने अदालत में दस्तावेज प्रस्तुत कर इस दावे को निराधार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बेवजह इस प्रकरण में फंसाया जा रहा है।

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अदालत में उठे अहम सवाल

सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से दो महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे—
1. क्या डिब्बाबंद बीफ की बिक्री को छत्तीसगढ़ कृषि मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2004 के तहत अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है?
2. क्या खाद्य लाइसेंस में इस प्रकार की वस्तु की बिक्री की अनुमति दी जा सकती है?

राज्य सरकार इन दोनों सवालों का अदालत के समक्ष संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं कर सकी।

हाईकोर्ट का निर्देश

अदालत ने राज्य शासन और अन्य पक्षकारों को निर्देशित किया है कि वे दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट करें कि डिब्बाबंद बीफ की बिक्री कानूनन अपराध है या नहीं और इस संबंध में लाइसेंस प्रावधान क्या कहते हैं।
जब तक शासन का जवाब दाखिल नहीं हो जाता, तब तक सहआरोपी कारोबारी रविनपाल अग्रवाल के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर रोक जारी रहेगी

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