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CG Budget Session: 16.55 लाख किसानों ने लौटाया 2.16 लाख हेक्टेयर रकबा, धान खरीदी पर मंत्री का विधानसभा में जवाब


CG Budget Session:- छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में धान खरीदी और किसानों के रकबा समर्पण का मुद्दा उठा।
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 में 16.55 लाख किसानों ने 2.16 लाख हेक्टेयर रकबा समर्पित किया।
यह जानकारी कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया के प्रश्न के जवाब में दी गई।


CG Assembly Budget Session: धान खरीदी और रकबा समर्पण पर सरकार का जवाब
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज धान खरीदी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 में प्रदेश के 16 लाख 55 हजार 149 किसानों ने करीब 2 लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा समर्पित किया है।

यह जानकारी उन्होंने कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी।

तकनीकी दिक्कतों को लेकर उठे सवाल

विधायक दिलीप लहरिया ने सरकार से पूछा था कि क्या एग्रीस्टेक पोर्टल में तकनीकी समस्याओं, पंजीयन संबंधी दिक्कतों या खरीदी की समय सीमा खत्म होने की वजह से ऐसे किसान रहे, जो टोकन मिलने के बावजूद अपना धान नहीं बेच पाए।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि
एग्रीस्टेक पोर्टल में रकबा शून्य या गलत दर्ज होने के कारण कितने किसान धान बेचने से वंचित रहे।
ऐसे मामलों में किसानों को हुई आर्थिक हानि का आकलन किया गया है या नहीं।
यदि नुकसान का आकलन हुआ है तो प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।

रकबा समर्पण को लेकर भी पूछा गया सवाल

विधायक ने यह भी पूछा कि किसानों से खसरा या रकबा समर्पण किन परिस्थितियों में कराया गया और इसके लिए शासन की कौन-सी नीति या आदेश लागू किया गया।

मंत्री ने दिया यह स्पष्टीकरण

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने अपने जवाब में कहा कि धान खरीदी अवधि के दौरान किसानों द्वारा लाए गए मानक धान की पूरी खरीदी की गई है। जिन किसानों ने अपना धान बेचने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, उनसे नियमानुसार रकबा समर्पण कराया जा सकता है और इसके लिए निर्देश जारी किए गए थे।

मंत्री ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 16,55,149 किसानों ने कुल 2.16 लाख हेक्टेयर रकबा समर्पित किया है।

ऋणी किसानों के मामले में यह प्रक्रिया

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन किसानों ने धान उपार्जन अवधि में उपार्जन केंद्रों में धान विक्रय नहीं किया, और वे ऋणी हैं, उनके अल्पकालीन कृषि ऋण की वसूली के लिए देय तिथि से पहले किसानों से संपर्क कर नकद राशि जमा कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

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