
CG School Exam: मुख्य परीक्षा से गायब 28 छात्र पूरक परीक्षा से भी नदारद, रोल नंबर और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
बिलासपुर की स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। बिलासपुर के नारायण टेक्नोक्रेट्स स्कूल से जुड़े 28 विद्यार्थियों को लेकर परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ये विद्यार्थी मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्हें पूरक (सप्लीमेंट्री) परीक्षा के लिए पात्र माना गया। हैरानी की बात यह है कि पूरक परीक्षा के पहले दिन भी ये छात्र परीक्षा केंद्र पर उपस्थित नहीं हुए।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार रायपुर के एक स्कूल से जुड़े 28 विद्यार्थियों को बिलासपुर के यू-डाइस कोड से जोड़कर छत्तीसगढ़ बोर्ड की कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षा के लिए रोल नंबर जारी किए गए। बिलासपुर परीक्षा केंद्र से कुल 57 रोल नंबर जारी हुए, जिनमें 28 विद्यार्थियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
आरोप है कि ये विद्यार्थी मुख्य परीक्षा के दौरान किसी भी विषय की परीक्षा में शामिल नहीं हुए। इसके बावजूद उन्हें पूरक परीक्षा में बैठने की पात्रता प्रदान की गई।
‘डबल रोल नंबर’ का खेल?
मामले में सबसे बड़ा आरोप तथाकथित “डबल रोल नंबर” व्यवस्था को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार पहले संबंधित स्कूल में सीबीएसई पैटर्न पर परीक्षा आयोजित कर परिणाम घोषित किया गया। बाद में विवाद बढ़ने पर इन्हीं विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा से जोड़ने के लिए अलग से रोल नंबर जारी किए गए।
इस प्रक्रिया को लेकर शिक्षा जगत में कई सवाल उठ रहे हैं।
जांच रिपोर्ट पर भी सवाल
विवाद बढ़ने के बाद जिला स्तर पर जांच समिति गठित की गई। हालांकि आरोप है कि जांच समिति ने स्कूल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी। दूसरी ओर शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड और परीक्षा संबंधी दस्तावेजों में दर्ज आंकड़े जांच रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 57 विद्यार्थियों के लिए रोल नंबर जारी किए गए थे, जिनमें से 28 विद्यार्थियों का वास्तविक परीक्षा रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है।
मुख्य परीक्षा में नहीं बैठे तो पूरक परीक्षा के पात्र कैसे?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पूरक परीक्षा का अवसर सामान्यतः उन्हीं विद्यार्थियों को मिलता है जो मुख्य परीक्षा में शामिल होकर किसी विषय में अनुत्तीर्ण होते हैं या नियमानुसार पात्र होते हैं।
ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि:
मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हुए विद्यार्थियों को पूरक परीक्षा की अनुमति किस आधार पर दी गई?
यदि विद्यार्थी वास्तविक रूप से दर्ज थे तो मुख्य और पूरक दोनों परीक्षाओं से अनुपस्थित क्यों रहे?
यदि वे परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए तो उनके परिणाम और अंक कैसे दर्ज किए जाएंगे?
प्रश्नपत्र और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी संदेह
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूरक परीक्षा के लिए विभाग की ओर से अलग प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए थे। संबंधित विद्यालयों को स्वयं प्रश्नपत्र तैयार कर परीक्षा आयोजित करने और अंक पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन 28 विद्यार्थियों ने परीक्षा ही नहीं दी, उनके लिए मूल्यांकन और अंक प्रविष्टि की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की जाएगी।
28 विद्यार्थियों की सूची भी सार्वजनिक
खबर में विवादित बताए जा रहे 28 विद्यार्थियों के नाम और रोल नंबर भी प्रकाशित किए गए हैं। इससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया है तथा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन की भूमिका पर निगाह
अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, विद्यार्थियों के भविष्य और शैक्षणिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं आधिकारिक जांच और विभागीय स्पष्टीकरण के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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