CG Crime News:- फर्जी IPS–CBI बनकर डराते थे, ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लूटते थे लाखों—बंधन बैंक कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड, पुलिस ने 37 लाख की ठगी में 5 आरोपी दबोचे

CG Crime News:- पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 37 लाख की साइबर ठगी का खुलासा किया है। इस मामले में राजस्थान के भीलवाड़ा से महिला समेत 5 अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपी खुद को फर्जी IPS, CBI और टेलीकॉम अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे। गिरोह का मास्टरमाइंड बंधन बैंक का कर्मचारी निकला। जांच में देशभर में 1.40 करोड़ से ज्यादा की ठगी के साक्ष्य मिले हैं, जबकि पुलिस ने मोबाइल, लैपटॉप और बैंक खातों को जब्त किया है।
Raigarh रायगढ़ | 24 अप्रैल रायगढ़ पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की गई बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए महिला समेत पांच अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। राजस्थान के भीलवाड़ा से पकड़े गए आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया गया है। गिरोह ने रायगढ़ के एक सेवानिवृत्त विद्युत विभाग पर्यवेक्षक से 36.97 लाख रुपये की ठगी की थी।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना रायगढ़ ने तकनीकी जांच, बैंक ट्रेल और साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर इस संगठित नेटवर्क का खुलासा किया।
रिटायर्ड अधिकारी को बनाया शिकार
फरवरी 2026 में केसर परिसर निवासी सेवानिवृत्त पर्यवेक्षक नरेंद्र ठाकुर ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी 2026 को एक महिला का कॉल आया, जिसने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी से जुड़ा बताया।
इसके बाद कॉल को फर्जी पुलिस और CBI अधिकारियों से जोड़ दिया गया, जिन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। वीडियो कॉल पर खुद को आईपीएस अधिकारी “नीरज ठाकुर” बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया।
ठगों के दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36,97,117 रुपये अलग–अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए करीब 2 लाख रुपये होल्ड भी कराए।
ऐसे काम करता था साइबर गिरोह
गिरोह के सदस्य खुद को TRAI, पुलिस, CBI और IPS अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते थे।
- पहचान पत्र के दुरुपयोग का डर दिखाना
- मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देना
- वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” का माहौल बनाना
- जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाना
बंधंन बैंक कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड
जांच में सामने आया कि गिरोह का मास्टरमाइंड राहुल व्यास है, जो भीलवाड़ा में बंधन बैंक का कर्मचारी है।
उसके साथ रविराज सिंह, आरती राजपूत (वेब डेवलपर), संजय मीणा और गौरव व्यास मिलकर संगठित तरीके से ठगी करते थे। आरोपियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वीडियो के जरिए साइबर ठगी के तरीके सीखे और अपने बैंक खातों का इस्तेमाल ट्रांजेक्शन के लिए किया।
देशभर में फैला ठगी का नेटवर्क
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह देशभर में सक्रिय था और अब तक करीब ₹1,40,77,300 की ठगी कर चुका है।
गौरव व्यास के खाते में अकेले 60 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन मिला है। सभी आरोपियों के बैंक खातों को सीज कर दिया गया है।
तकनीकी जांच से मिला सुराग
साइबर पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर पाया कि पीड़ित द्वारा भेजे गए 4.50 लाख रुपये भीलवाड़ा के खातों में जमा हुए थे। इसके बाद विशेष टीम गठित कर राजस्थान भेजी गई, जहां मुख्य आरोपी राहुल व्यास को हिरासत में लेकर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया।
बरामदगी और साक्ष्य
पुलिस ने आरोपियों के पास से:
- 7 मोबाइल फोन
- 1 लैपटॉप
- बैंक दस्तावेज और एटीएम जमा पर्चियां
बरामद की हैं। व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग में ठगी के पुख्ता सबूत मिले हैं।
रकम का तय था प्रतिशत
गिरोह में ठगी की रकम का बंटवारा पहले से तय था—
- राहुल व्यास: 5%
- आरती राजपूत: 5%
- गौरव व्यास: 4%
- रविराज व संजय: 2-2%
- अन्य सदस्यों को भी हिस्सा दिया जाता था
पुलिस टीम की भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी साइबर निरीक्षक विजय चेलक, एएसआई ज्योत्सना शर्मा, प्रधान आरक्षक करूणेश राय, आरक्षक पुष्पेंद्र जाटवर, मनोज पटनायक सहित साइबर टीम की अहम भूमिका रही।
एसएसपी का अलर्ट मैसेज
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने नागरिकों से अपील की है—

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इस मामले के बाद लोगों से सावधान रहने की अपील की है। उनका कहना है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।

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