CG News:- खारंग जल संसाधन संभाग की नहरों में बह रही भ्रष्टाचार की गंगा! (भाग-1)

L2.88 करोड़ की योजना में बड़ा खेल? कागजों में 2580 मीटर लाइनिंग का भुगतान, मौके पर सिर्फ 1287 मीटर काम होने का दावा
मुख्य अभियंता तक पहुंची शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं, आरोप- जिस अधिकारी पर सवाल, उसी से कराई जांच और शिकायत कर दी निराकृत

CG News:- बिलासपुर के खारंग जल संसाधन संभाग अंतर्गत फुटामुड़ा जलाशय की नहर रिमॉडलिंग एवं सीसी लाइनिंग कार्य में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। शिकायत के मुताबिक विभागीय अभिलेखों में 2580 मीटर लाइनिंग कार्य दर्शाकर ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर केवल 1287 मीटर लाइनिंग कार्य मिला। मामले की शिकायत मुख्य अभियंता से की गई, लेकिन कार्रवाई के बजाय कथित तौर पर उसी अधिकारी से जांच कराकर शिकायत को निराकृत कर दिया गया।
बिलासपुर। करोड़ों रुपये की सरकारी योजना… किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का दावा… लेकिन सवाल यह है कि क्या नहर में पानी से ज्यादा भ्रष्टाचार की गंगा बहाई गई? बिलासपुर के खारंग जल संसाधन संभाग के अंतर्गत आने वाले फुटामुड़ा जलाशय नहर रिमॉडलिंग एवं सीसी लाइनिंग कार्य में गंभीर वित्तीय अनियमितता और फर्जी माप दर्ज कर लाखों रुपये के भुगतान का आरोप सामने आया है। शिकायत में दावा किया गया है कि विभागीय माप पुस्तिका में जिस कार्य का भुगतान किया गया, उसका बड़ा हिस्सा मौके पर दिखाई ही नहीं देता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायत सीधे मुख्य अभियंता, हसदेव कछार जल संसाधन विभाग, बिलासपुर तक पहुंचने के बावजूद आज तक न तो निष्पक्ष जांच हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।
2.88 करोड़ की योजना… 270 हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य
जल संसाधन विभाग मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन, अटल नगर रायपुर ने 1 जुलाई 2020 को जारी पत्र के माध्यम से मुख्य अभियंता, हसदेव कछार जल संसाधन विभाग, बिलासपुर को फुटामुड़ा जलाशय के नहर रिमॉडलिंग, पक्के कार्य एवं लाइनिंग कार्य के लिए 2 करोड़ 88 लाख 18 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की थी।
योजना का उद्देश्य 105 हेक्टेयर सिंचाई की कमी को दूर कर कुल 270 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था। लेकिन अब इसी योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
माप पुस्तिका में 2580 मीटर… मौके पर सिर्फ 1287 मीटर!
शिकायत के अनुसार दायीं तट नहर में अनुबंध क्रमांक 22/DL/20-21, दिनांक 12 फरवरी 2021 के तहत 0 से 3000 मीटर तक सीसी लाइनिंग का कार्य किया जाना था।
विभागीय माप पुस्तिका क्रमांक-2732 में दर्ज विवरण के अनुसार—
* 54.00 मीटर (पृष्ठ-38)
* 155.40 मीटर (पृष्ठ-57 एवं 139, दिनांक 30.05.2021)
* 207.00 मीटर (पृष्ठ-47 एवं 131, दिनांक 16.05.2021)
* 711.90 मीटर (पृष्ठ-19 एवं 103, दिनांक 08.03.2021)
सहित कुल 2580 मीटर लाइनिंग कार्य दर्ज कर वर्ष 2021 में ठेकेदार एजेंसी को भुगतान कर दिया गया।
लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया तो सिर्फ 1287 मीटर लाइनिंग कार्य मिला। यानी करीब 1200 मीटर नहर लाइनिंग का कार्य किए बिना ही फर्जी माप दर्ज कर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
शिकायत हुई… लेकिन कार्रवाई नहीं
इस पूरे मामले की शिकायत मुख्य अभियंता, हसदेव कछार जल संसाधन विभाग, बिलासपुर से की गई। शिकायत में फर्जी माप, वित्तीय अनियमितता और निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई।
लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय जिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए गए, उसी अधिकारी से जांच कराकर शिकायत को निराकृत कर दिया गया। यदि यह आरोप सही है तो यह केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
नियम भी तय करते हैं मुख्य अभियंता की जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता (भाग-1) के नियम-10 के अनुसार मुख्य अभियंता का दायित्व है कि वह अपने कार्यालय एवं अधीनस्थ आहरण-वितरण अधिकारियों द्वारा वित्तीय और प्रशासनिक नियमों का पालन सुनिश्चित करे। साथ ही मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालन अभियंता निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के सही उपयोग के लिए जवाबदेह होते हैं।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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