
DEO Suspended:- कक्षा चौथी के पेपर में राम’ को कुत्ते के नाम के विकल्प में कैसे शामिल हो गया? जब जिम्मेदारी तय थी, तो प्रश्नपत्र बिना जांच के पास कैसे हो गया? क्या कोई निगरानी तंत्र था, या सब कुछ कागजों में ही सीमित रहा? हाईकोर्ट मामले में समय पर अपील क्यों नहीं की गई, जबकि सूचना दी गई थी? ऑडिट में सामने आई अनियमितताएं पहले क्यों नहीं सुधारी गईं? निलंबन हो गया, लेकिन क्या इससे सिस्टम की खामियां दूर हो पाएंगी?
Mahasamund DEO Suspended:- महासमुंद जिले में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अंग्रेजी विषय के पेपर में कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में “शेरू” के साथ “राम” शामिल किए जाने को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होने का मामला सामने आया। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने जांच कराई और गंभीर लापरवाही पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
जांच में उजागर हुई बड़ी लापरवाही
जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि प्राथमिक शालाओं के अर्धवार्षिक परीक्षा प्रश्नपत्रों के निर्धारण, मुद्रण और वितरण की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की होती है। इसके बावजूद विजय कुमार लहरे द्वारा प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया तय नहीं की गई और न ही कोई ठोस कार्ययोजना बनाई गई।
इसी लापरवाही का परिणाम रहा कि कक्षा चौथी के अंग्रेजी प्रश्नपत्र में ऐसा आपत्तिजनक प्रश्न शामिल हो गया, जिसने विभाग की छवि को धूमिल किया।

धार्मिक भावनाओं को ठेस का आरोप
जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि भगवान राम का नाम कुत्ते के नाम के विकल्प में शामिल करना “निंदनीय” और “धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला” है। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि विभागीय स्तर पर भी गंभीर प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
हाईकोर्ट मामले में भी लापरवाही
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। महासमुंद जिले से संबंधित प्रकरण (WPS नं. 1745/2022) में DEO को विभागीय आदेश (दिनांक 26.11.2025, अटल नगर) के तहत प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था।
संचालनालय की विधि शाखा द्वारा 3 दिसंबर 2025 को व्यक्तिगत व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से उन्हें अवगत भी कराया गया, बावजूद इसके उन्होंने समय पर उच्च न्यायालय बिलासपुर में अपील दायर नहीं की। इसे आदेश की अवहेलना और कर्तव्य में घोर लापरवाही माना गया है।

अंकेक्षण रिपोर्ट में अनियमितताएं
विभागीय अंकेक्षण प्रतिवेदन में भी उनके कार्यकाल के दौरान लेखा संबंधी गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। यह पाया गया कि उन्होंने अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती और स्वेच्छाचारिता से कार्य किया।
नियमों का उल्लंघन, तत्काल निलंबन
स्कूल शिक्षा विभाग ने इस पूरे प्रकरण को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 5(3) का उल्लंघन मानते हुए इसे गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखा है।
निलंबन आदेश में कहा गया है कि विजय कुमार लहरे द्वारा लापरवाही, अनुशासनहीनता और मनमाने आचरण के चलते यह कार्रवाई की गई है।

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