CG News:-जांजगीर-नैला नगर पालिका में नाली निर्माण भुगतान पर सवाल, पार्षद ने जताई वित्तीय अनियमितता की आशंका, 7 दिन में मांगे दस्तावेज

Janjgir-Champa News:-
जांजगीर-नैला नगर पालिका में विकास के नाम पर हो रहे काम अब सवालों के घेरे में हैं। वार्ड 07 के पार्षद विष्णु यादव (छोटू) ने वार्ड 06, 07 और 08 में चल रहे आरसीसी नाली निर्माण के भुगतान पर सीधे-सीधे गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
पार्षद का कहना है कि लाखों रुपये के रनिंग बिल में ऐसी मदें जोड़ दी गई हैं, जिनका मूल तकनीकी स्वीकृति में कहीं नामोनिशान नहीं है। फव्वारे जैसी खुदाई, पानी निकासी, मिट्टी भराई और शटरिंग की माप में गड़बड़ी—सब कुछ मिलकर पूरे बिल की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
उन्होंने साफ कहा है कि बिना संशोधित स्वीकृति और परिषद की मंजूरी के इस तरह का भुगतान नियमों का खुला उल्लंघन है। अब पार्षद ने 7 दिन में पूरा दस्तावेजी जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि अगर भुगतान हुआ तो मामला ‘अवैध व्यय’ की श्रेणी में जाएगा।
अब सवाल ये है कि—क्या ये सिर्फ तकनीकी गलती है या फिर विकास कार्यों के नाम पर बड़ा खेल?

JanjgirChampa:- जांजगीर–चांपा ।नगरपालिका परिषद जांजगीर–नैला के वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद विष्णु यादव (छोटू) ने वार्ड क्रमांक 06, 07 और 08 में चल रहे नाली निर्माण कार्य के भुगतान में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताते हुए मुख्य नगरपालिका अधिकारी को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. इसके साथ ही उन्होंने मामले से जुड़े कई गंभीर बिंदुओं पर 7 दिनों के भीतर प्रमाणित दस्तावेजों की मांग की है. सीएमओ को सौंपे गए पत्र में वार्ड पार्षद ने बताया कि उनके वार्ड में ‘राजू सिंह के घर से ओंकार के घर तक आरसीसी नाली निर्माण‘ का कार्य प्रगति पर है, जिसकी तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 560 दिनांक 13.12.2022 को कुल 77,40,000 रुपये की लागत से जारी की गई थी. वर्तमान में इस कार्य के एवज में 34,84,870 रुपये का ‘द्वितीय चालू खाता बिल सी‘ तैयार किया गया है. पार्षद का आरोप है कि इस रनिंग बिल के बारीकी से अवलोकन करने पर पता चला है कि इसमें ऐसी कई सामग्रियां और मदें शामिल कर दी गई हैं, जो मूल तकनीकी स्वीकृति (प्राक्कलन) में दूर–दूर तक शामिल नहीं थीं.
बिल में जोड़ी गई संदेहास्पद मदों का ब्यौरा देते हुए पार्षद ने बताया कि इसमें सीमेंट कंक्रीट मलबे की ढहाई के लिए 1,23,514.02 रुपये, फव्वारे और अन्य उद्देश्यों के लिए खुदाई के नाम पर 2,11,593.69 रुपये, खुदाई के दौरान पानी की पंपिंग द्वारा निकासी के लिए 3,09,702.50 रुपये, उप–बोर सह जल निकासी परत आधार हेतु 72,281.25 रुपये और खुदाई की मिट्टी से भराई के नाम पर 29,689.40 रुपये शामिल किए गए हैं. इसके अलावा सामग्री क्रमांक 11 और 12 में शटरिंग (फॉर्म वर्क) की माप इकाई को वर्ग मीटर के स्थान पर नियमों के विपरीत घन मीटर अंकित किया गया है, जो तकनीकी रूप से पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है.
छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 94(3) एवं छत्तीसगढ़ नगरपालिका लेखा नियम 1971 के नियम 71 का हवाला देते हुए पार्षद विष्णु यादव ने स्पष्ट किया है कि मूल प्राक्कलन से बाहर के किसी भी कार्य या सामग्री के भुगतान के लिए संशोधित तकनीकी स्वीकृति और परिषद का औपचारिक अनुमोदन अनिवार्य होता है. उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी से तीखे सवाल पूछते हुए पूछा है कि क्या इस अतिरिक्त सामग्री के लिए सक्षम अधिकारी से संशोधित तकनीकी स्वीकृति ली गई है? क्या इन दरों को तकनीकी समिति और परिषद से अनुमोदित कराया गया है? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक सामान्य आरसीसी नाली निर्माण कार्य में “फव्वारा खुदाई” जैसी मद जोड़ने का क्या तकनीकी औचित्य है और शटरिंग की माप इकाई बदलने का आधार क्या है?
पार्षद ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी से मांग की है कि जब तक इन सभी बिंदुओं का सक्षम दस्तावेजों के साथ समाधान नहीं हो जाता, तब तक इस बिल से संबंधित आगामी भुगतान को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए. उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बिना सक्षम स्वीकृति के यह भुगतान किया गया है या प्रक्रिया में है, तो यह ‘अवैध व्यय‘ की श्रेणी में आएगा, जिसके लिए सीधे तौर पर संबंधित भुगतानकर्ता अधिकारी जिम्मेदार होंगे. उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी से 7 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई से लिखित में अवगत कराने को कहा है और स्पष्ट किया है कि जानकारी न मिलने की स्थिति में वे मामले को उच्चाधिकारियों के समक्ष ले जाने के लिए विवश होंगे. मामले की गंभीरता को देखते हुए इस शिकायत की प्रतिलिपि जांजगीर–चांपा कलेक्टर और नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है.

यहीं से असंतुलन का मुद्दा उठ रहा है, क्योंकि शेष राशि के वितरण में कई वार्डों को जहां बड़े कार्य मिले हैं, वहीं कुछ वार्डों को बेहद सीमित बजट दिया गया। वार्डवार वितरण में भारी अंतर, आंकड़े बने विवाद की वजह
इन आंकड़ों को लेकर विपक्षी पार्षदों ने गंभीर असंतुलन का आरोप लगाया है।
विपक्ष का आरोप: “भेदभावपूर्ण तरीके से हुआ आवंटन”

कांग्रेसी पार्षदों का कहना है कि जिन वार्डों में विपक्षी जनप्रतिनिधि चुने गए हैं, वहां विकास कार्यों के लिए अपेक्षाकृत कम राशि दी गई है। उनका आरोप है कि यह आवंटन राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रभावित है और इसमें निष्पक्षता नहीं बरती गई।
लोकतांत्रिक निष्पक्षता पर भी सवाल
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाता है, ऐसे में उनसे पूरे शहर के 25 वार्डों के लिए समान और संतुलित विकास की अपेक्षा की जाती है। लेकिन जारी सूची में यह संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है।
सामान्य सभा में गरमाएगा मामला, आंदोलन की चेतावनी
इस बजट असंतुलन को लेकर आगामी नगर पालिका सामान्य सभा बैठक में तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है। विपक्षी पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि विकास कार्यों के आवंटन की पुनर्समीक्षा नहीं की गई तो वे इस मुद्दे को राज्य स्तर तक ले जाएंगे और जरूरत पड़ने पर आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा।
जाने क्या कहा पार्षद ने
एक नाली मे दो प्रकार का बिल कैसे बनेगा पिछले साल जिस नाली का हजार रूपए मे भूगतान किया गया था इस साल उसी प्रकार की नाली मे लाखो रूपए का भूगतान किया गया है स्टेमेट के अंदर ही भूगतान कर सकते है बिना स्टेमेट रिवाइस करते हुए बिल का भूगतान कर दिया गया
इंजीनियर मोनिका प्रसाद मैडम की कारस्तानी है जिन्होने 1077 मीटर नाली मे 561मीटर नाली आधा बना है लेकिन भूगतान आधा से ज्यादा कर दिया गया है ठेकेदार दीपानी कंस्ट्रक्शन का है जो नैला का है गुणवत्ता अच्छी नही है पानी भराव के साथ पानी नाली से बाहर बहने लगता है
विष्णु यादव पार्षद नपा जांजगीर नैला
Live Cricket Info


