Bilaspur News:- सिरगिट्टी के लोग आखिर क्यों है भयभीत, आखिर क्यों नहीं हो पा रहा पुलिस सत्यापन ?? शिकायत और आदेश के बाद भी थानेदार खामोश,इस भीड़ को किसका है संरक्षण…

Bilaspur News:-सिरगिट्टी का मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित सवाल नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवस्था और निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वर्षों से यहां छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के साथ दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियां रहकर काम कर रहे हैं, लेकिन उनके पुलिस सत्यापन की स्थिति अब तक साफ नहीं है। एसएसपी रजनेश सिंह ने जिलेभर में किरायेदारों, बाहरी व्यक्तियों और घरेलू सहायकों के अनिवार्य सत्यापन के निर्देश दिए हैं। अब सवाल यह है कि जब पूरे जिले में सत्यापन की बात हो रही है, तो सिरगिट्टी जैसे औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों की पहचान और दस्तावेजों की जांच कब पूरी होगी?
बिलासपुर। एक तरफ बिलासपुर पुलिस जिलेभर में किरायेदारों और बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन का अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि वर्षों से हजारों बाहरी युवक-युवतियां यहां रहकर काम कर रहे हैं, तो उनका दस्तावेजी पुलिस सत्यापन आखिर अब तक क्यों नहीं कराया गया? आखिर इतने बड़े स्तर पर बाहरी लोगों की मौजूदगी के बावजूद प्रशासनिक निगरानी को लेकर स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं है?
दूसरे राज्यों से भर्ती, स्थानीय लोगों से दूरी क्यों?
क्षेत्रवासियों का दावा है कि संबंधित कंपनी में छत्तीसगढ़ के कोंडागांव, बस्तर, जशपुर सहित अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियों को लाकर रखा जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिलासपुर जिले के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जाती और न ही उन्हें कंपनी की गतिविधियों की जानकारी आसानी से मिल पाती है। उनका सवाल है कि यदि सब कुछ वैधानिक और पारदर्शी है, तो स्थानीय लोगों से दूरी आखिर क्यों बनाई जाती है? हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस सत्यापन पर सबसे बड़ा सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पूरे जिले में किरायेदारों और बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन का अभियान चल रहा है, तब सिरगिट्टी में वर्षों से रह रहे हजारों लोगों का व्यापक पुलिस सत्यापन अब तक क्यों नहीं हुआ? उनका कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां सुरक्षा मानकों का और अधिक सख्ती से पालन होना चाहिए।
पुराने विवादों का भी हवाला, जांच की मांग
क्षेत्रवासियों का दावा है कि अतीत में मारपीट सहित कुछ गंभीर आपराधिक मामलों में इस कथित नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आने की चर्चाएं हुई थीं। एक चर्चित हत्या प्रकरण के बाद भी क्षेत्र में व्यापक पुलिस सत्यापन नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, किसी भी मामले में संबंधित कंपनी की संस्थागत भूमिका किसी सक्षम न्यायालय या जांच एजेंसी द्वारा स्थापित नहीं की गई है।
शिकायतें होती रहीं, थाना प्रभारी बदले… फिर भी कार्रवाई अधूरी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मुद्दा नया नहीं है। वर्षों से पुलिस और प्रशासन को शिकायतें दी जाती रही हैं। इस दौरान कई थाना प्रभारी बदले, जांच और कार्रवाई के दावे भी हुए, लेकिन लोगों का आरोप है कि व्यापक स्तर पर पुलिस सत्यापन और दस्तावेजों की जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी।
इसी बीच क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कार्रवाई में लगातार हो रही देरी के कारण लोगों के बीच कई तरह की आशंकाएं पैदा हो गई हैं। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित कंपनी को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जबकि कुछ लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्र में भय का माहौल, अब एसएसपी की कार्रवाई पर नजर
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बड़ी संख्या में बाहरी लोगों की मौजूदगी और पुलिस सत्यापन को लेकर उठ रहे सवालों के कारण लोगों में असुरक्षा की भावना है। उनका कहना है कि आखिर ये लोग कौन हैं, कहां से आए हैं, किन दस्तावेजों के आधार पर यहां रह रहे हैं और काम खत्म होने के बाद कहां चले जाते हैं? यदि भविष्य में कोई बड़ी आपराधिक घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी बड़ा सवाल है।
हाल ही में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने जिलेभर में किरायेदारों, बाहरी व्यक्तियों और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों के अनिवार्य सत्यापन के सख्त निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि सिरगिट्टी में भी विशेष अभियान चलाकर सभी बाहरी व्यक्तियों का निष्पक्ष और व्यापक सत्यापन कराया जाएगा। उनका कहना है कि यदि शिकायतों में सच्चाई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की जाए।
अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर
स्लोगों की मांग है कि संबंधित कंपनी, उसके संचालकों तथा वहां रह रहे सभी बाहरी व्यक्तियों का नियमानुसार दस्तावेजी और पुलिस सत्यापन कराया जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि क्षेत्र में व्याप्त आशंकाएं समाप्त हों और लोगों का कानून व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत हो सके।
फिलहाल सिरगिट्टी में एक ही सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है—जब जिलेभर में पुलिस सत्यापन अभियान चल रहा है, तब इस औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों से रह रहे हजारों बाहरी लोगों का व्यापक सत्यापन आखिर कब पूरा होगा?

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