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CG ACB News:– रिश्वतखोरी के तीन मामलों चालान पेश, एएसआइ और कलेक्टोरेट के बाबू समेत तीन आरोपित अदालत पहुंचे

बिलासपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) बिलासपुर ने रिश्वतखोरी के तीन अलग-अलग मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को आरोपित के खिलाफ विशेष न्यायालयों में अभियोग पत्र (चालान) पेश कर दिया। तीनों आरोपित अलग-अलग विभागों में पदस्थ थे और उन्हें एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई के दौरान रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। अब मामलों की सुनवाई संबंधित विशेष न्यायालयों में होगी।

पहला मामला कोरबा जिले का है। 29 मई 2026 को अमृतलाल बघेल की शिकायत पर एसीबी ने पोड़ी उपरोड़ा के बीईओ कार्यालय में पदस्थ बाबू प्रदीप मिश्रा को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। जांच पूरी होने के बाद मंगलवार को विशेष न्यायालय, पीसी एक्ट, कोरबा में चालान पेश किया गया।

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दूसरा मामला बिलासपुर का है। 10 मई 2026 को देवेंद्र कश्यप की शिकायत पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कार्यालय में पदस्थ बाबू विजय पाण्डेय को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। आरोपित के खिलाफ अपराध किया गया था। इस मामले में एसीबी ने जांच पूरी कर विशेष न्यायालय, पीसी एक्ट, बिलासपुर के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

तीसरा मामला सक्ती जिले के चंद्रपुर थाना का है। यहां सहायक उप निरीक्षक (एएसआइ) एसएन मिश्रा को 10 मई 2026 को शिव बरेठ से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए एसीबी ने ट्रैप किया था। आरोपित के खिलाफ जुर्म दर्ज कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। इस मामले का चालान विशेष न्यायालय, पीसी एक्ट, जांजगीर-चांपा में पेश किया गया। एसीबी अधिकारियों के अनुसार तीनों मामलों में जांच पूरी होने के बाद पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर समयबद्ध तरीके से अभियोग पत्र प्रस्तुत किए गए हैं। अब आरोप तय होने के बाद संबंधित विशेष न्यायालयों में सुनवाई होगी।

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तीन ट्रैप, तीन विभाग, तीन चालान:–;

एसीबी ने जिन तीन मामलों में चालान पेश किया है, उनमें अलग-अलग विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। कोरबा के पोड़ी उपरोड़ा बीईओ कार्यालय के बाबू प्रदीप मिश्रा 40 हजार रुपये, बिलासपुर कलेक्टोरेट के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कार्यालय के बाबू विजय पाण्डेय 15 हजार रुपये और सक्ती जिले के चंद्रपुर थाने के एएसआइ एसएन मिश्रा 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए ट्रैप किए गए थे। तीनों मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज कर जांच पूरी की गई और अब संबंधित विशेष न्यायालयों में अभियोग पत्र पेश कर दिए गए हैं।

ट्रैप के बाद अब शुरू होगी न्यायिक प्रक्रिया:–

एसीबी की ट्रैप कार्रवाई के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण अभियोग पत्र पेश करना होता है। विवेचना पूरी होने पर पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जाता है। इसके बाद न्यायालय आरोप तय करता है और गवाहों के बयान सहित सुनवाई शुरू होती है। दोष सिद्ध होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपित को कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है। एसीबी का कहना है कि रिश्वतखोरी के मामलों में त्वरित विवेचना और समय पर चालान पेश करने से भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई अधिक प्रभावी बनती है।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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